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Sunday, April 29, 2018

HARIDAS KELILILA (31 to 40)(Haridas bhajan. 5)

HARIDAS KELILILA (31 to 40)(Haridas bhajan. 5)










३१ ===ऐसी तौं विचित्र जोरी बनी.ऐसी कहूँ न देखि सुनी न भनी ..... मनहूँ कनक सुदाह करि करि देह अदभुत ठनी.....श्री हरिदास के स्वामी स्याम तमाले उछंगि बैठे धनी .............अर्थ ==पद ==३१ ----निकुंज में ऐसी विचित्र जोरि विराज रही है कि सब सखियन उन पर बार बार बलिहारी जाती हैं .उनकी चर्चा के अलावा उनको कोई दूसरा काम नहीं है ,,,पूरा दिन वह उन्हें निहारते हीं रहती हैं और उनके गुणों का गान करती रहती हैं ,,,,,,,,बिहारी बिहारिनि जु कि हँसन,लटकन ,चलन माधुरी उनके हृदय कि रस पूर्ति करता रहता है .......प्रिया जु के नुपुर कि धीमी धीमी ध्वनि ,कँगन की खन खन की आवाज तों मानों उनके दिल को लूट हीं लेते हैं ,,,श्री वृन्दावन धाम तों सुख का धाम है ,,यहाँ की ललित कुन्जें सदा प्रिया प्रियतम जु की जोरि को अपनी गोद में खिलाने को आतुर रहती है नित्य नयी नयी लीलाएँ उपजती रहती हैं ..,लताएँ यहाँ झुक झुक कर इनके चरणों में लोट पोट होने को आतुर रहती हैं ......आज तों निकुंज में बहुत अधिक नव नव छवि छारही है ,,,आज तों बिहारी जी ने राधा जु का वेश धारण किया है .,और राधा जु बिहारी जी बनी हुई हैं ...दोनों ने ऐसी कृपालुता कर के आज वेश पलट लिया है,,दोनों की चाह .परे, रूप अंग-अंग में और फिर अंग अंग जैसे पिघल कर एक हीं रूप -देह बन गए ....दोनों की उपमा में घन दामिनी भी लजाती है ,,हरिदास जी के स्वामी श्याम तमाल बन बैठे हैं ,,,,,प्यारी जु लाल जु का तकिया लेकर बगल में बैठीं हैं ....हरिदासी सखी आज की विचित्र जोरी को निहारती हुई बोली ----आज प्यारी जु ,बिहारी जी पर कृपालु हैं ...इस शोभा का वर्णन नहीं किया जा सकता ....दोनों का हास-परिहास देखकर वह प्रेम में डूब गए ...श्री हरिदास
 31----eisi tho vichitra bani------ The divine jori is unique that each and every part of their body is fullof nectoral bliss. In today’s leela in the nikunj today pyariji has become pritam and pritam has become pyariji. They both have melted and become one. The ghan damini metafer is also inappropriate today Swami sri haridas ji says it seems that bihariji is a tamaal (trunk of a tree) and Ladliji is just holding on to it. No person can describe this keli leela which can be understood only by the duo.

पद ---३२ ---हँसत खेलत बोलत मिलत देखो मेरी आँखिन सुख बीरी परस्पर लेत कहवावत ज्यूँ दामिनी घन चमचमात सोभा बहु भांतिन सुख .........सृति घुरि राग केदारौ जम्यौ अधराति निसा रोम रोम सुख .....श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी के गावत सुर देत मोर भयौ परम सुख्.....अर्थ --पद==३२ ---निकुंज में दोनों पिया-प्रिया सखियों से घिरे हुए हैं ,यहाँ प्रेम रस की वर्षा हो रही है ,,निकुंज में शीतल ,मंद, सुगंधित पवन वेगवेती हो रही है ..फूलों की अति सुन्दर महक से जल ,थल,पुलिन ,उपवन सब महक रहे हैं ,चारों ओर से मोर ,पिक ,चातक ,कोकिला आदि पक्षियों की जय जयकार की ध्वनि सुनाई दे रही है .....ऐसे वतावरण में बिहारी जी वा [और] बिहारिनि जु रस से भरे सुख् सागर में हिल मिल कर हँसते हुए खेल रहे हैं .....सखी हरिदासी इस सुख् को अपने नेत्रों के द्वारा देख कर ,और सखियों को कह रही हैं....
तुम्हारा हंसना खेलना बोलना और मिलने का सुख मेरी आखों मे देखो।मुझे यह अति प्रिय लगता है। आप के आभूषण की ध्वनि मेरे चित को चूरा लेती है।जिस तरह घन और दामिनी मिलती है इसी तरह आप के अंग मिलते हुए अति सुन्दर लगते है। कभी आप एक दूसरे की बाहो मे कभी एक दूसरे को पान खिलाते हुए जो केलि करते हो , मै देखती ही रह जाती हूं। श्री हरिदास के स्वामी कुछ बिहारी जब ऐसे आनन्द मै मगन होते है तो सिरोही को अति सुख होता है
तेरे नूपुर धुनि री प्यारी हरवं सुनि i अचल चले चल रहै री रहित गति ii खग -मृग व्रत मानों धरयो है मुनी i बव निकुंज वर सुह्स्थ सावरों लाल ii सेज्या रचित बहु कुसुम चुन चुनी i श्री विठाल विपुल की रीति मिलि है --- मदन जीति तू सिरमोर सब गुननि गनी ii ...................................... प्रिया-प्रीतम निकुंज मगल में सिंघासन पर विराजमान हैं, बिहारिनिदासी जू का आवगमन होते ही प्रीतम जी अति प्रस्स्नता से प्रेम सहेली का स्वागत करते हुए बोले -हे प्यारी आवो ! तुम्हारा स्वागत है आप खूब आईं समय पर प्यारी सखी ! बिहारिनि दासिजू प्रसन्ता सेप्रिय जी से बोली बोली---'हे प्यारी जू ! आज तो बिहारिजू आपके रूप को देख कर अति मोहित हो रहें हैं ऐसा लगता है इन् के तन मन ,प्रान इन के बस में नही हैं.' ऐसे लग रहा है किपिय का मन अब प्रिय जू कि नुपुर कि धुन सनने मै मचल रहा है.इसध्वनि के सामने तो मुरली की धुन भी फीकी हो जाती है ,जो मुरली पूरे विश्व का मन मोहती है आज इस नूपुर की धुन के आगे लज्जित हो रही है.आज तो नुपूर की ध्वनि को सुनने के लिय मोहन कैसे मौन ह् गये हैं और प्रिय जू आप से को बार बार नुपूर की धनि सुनने का अनुरोध कर रहें हैं.आज लाडली जू १ आप की भी भरपुर कृपा है की आप प्रीतम पर बार बार लाड़ लडाते ही उन को अपनी नुपूर की ध्वनि बार बार सुना कर मुस्कराते हुए हर्षित का रही हो और पिय की ओर कितने मधुर भाव से निहार रही हो.प्रीतम भी कैसे तुम्हारे चरणों मैं लोट पोट हो रहे हीं.प्रिय जू के चंचल्चार्नन से नूपुर की अप्पोर्व ध्वनि सुन कर लाल जू कोटि कोटि मनोरथ की पूर्ती कर रहें हैं.उन का हृदय कमल कैसा खिल रहा है , इनके श्रवणन से इन्हे कितना अपार सुख मिल रहा है प्रिय जू के चरनो पे बलिहारी जाऊं , लाल जू इन चरनन पर रीझ -रीझ कर अपने उर पे लगा रहें हैं.दोनों के अनंद के आन्सू नैनों से झर रहें हैं. अपलक द्रिस्ज्ती से प्रीतम, प्रियाजू को कैसे निहार रहे हैं ? दोनों ओर से शोभा सिंधु का मधुर मिलन हो ऐसा लगता है.इनके मिलन सुख में आज समय का तो आभास ही नही हो रहा.वह री सखि ! निकुंज मैं आज ऐसा रस बरस रहा है की लाल में प्यारी और प्यारी में लाल के दर्शन हो रहे हैं.युगल के आज के विहार का रस बहुत अनिखा है ,दिव्या है इसकी गति तो कोई विरला ही समझ सकता है.
सन मुख भयै अभै कीनै निज जन जानि, जिन जिन कै मन संदेह भ्रम भीर कौ i साधन सिद्धांत सब खत कवि महन्त ,भजन एकांत रस हंस नीर ल्शीर कौ ii निपट मिटी विहार रस रीती कौ सिंगार, ऐसौ कौ उदार उपकारी प्र्पीर कौ i रसिक अनन्यनि भावे श्री मुख सांवरो गावे, गुरुनि श्री हरि दास आसुधीर कौii अर्थ--- स्वामी श्री हरिदास जी कि अति कृपालुता का वर्णन करते हुए श्री विहारिनिदासी जू इस पद्य मैं उन कि कृपा का बखान करते हैं और कहते है, कि जगत में परमार्थी और कवि व कई महंतों नें साधना एवं सिद्धन्त के ऐसे से स्वरुप का वर्णन किया है , जिस से अनेक प्रकार के भ्रम उत्पन हो जाते हाँ लेकिन जो जन स्वामी श्री हरि दासी जू की शरण मैं आ जातें हैं , उन पर प्रिय-प्रीतम कि कृपा का कहना ही क्या? उन्हें तो यह ललिता सखी निहाल कर देती है. इन्हें तो वह सब का सार स्वरुप प्रथम समागम में ही एकांत -रस- विलास महल का अद्भुत नित्य विहार रस दे कर निहाल कर देती है.अपने निज जन को वयस् प्रिय-लाल का नित्य विहार कि अनन्यता का दान कर देती है.इसिलिय इस मार्ग को हंस कि तरह नीर क्षीर विवेक जैसा सहज व सरल मार्ग बताया है.यह कैसा है? इस में सकामना नही है इस मैं तो पिय-प्यारी को निष्कामता से लाड़ चाव किया जाता है ,सभी सखिया निस्वार्थ प्रेम से सेवा करतीं हैं, उन्हें अपने लिय कोई सुख कि कामना नही है.यह रस बहुत ही दुर्लभ है. यह प्रेम देश है , जिस में केवल देना ही देना है लेने का तो कोई काम ही नही.प्रेम मैं अपन्न्पो तो मिट जाता है अपने इष्ट कि स्वांस से स्वांस मिलाने से ही सुख मिलता है.पिय-प्यारी का रुख देख कर ही इनकी सेवा हो सकती है अपना अभिमान अलग करके सब कामनाओं को त्यागना होता है श्री हरि दास जी अति उदार , उपकारी, एवं निष्काम हैं उन से किसी कि पीड़ा नही देखी जाती इसलिय यह अमूल्य वस्तु को कोई देने मैं कंजूसी नही करते. परन्तु इस प्रेम के खजाने को अपने निज जनों के आगे ऐसे खोल देते हैं जैसे कोई दानी अपने दोनो हाथों से दान करता हो. ऐसे सतगुरु श्री स्वामी हरिदास जी कि शरण लेने मैं ही भलाई है...................ललिता सखी ही श्री हरि दास कि की अवतार हैं. उन के बिना निकुंज महल मैं कोई भी प्रवेश नही पा सकता.
 32---- hansat khelat, bolat,milat------ In the niknj mahal the divine couple was talking and laughing with each other. Haridasi sakhi was overwhelmed and delighted to see them enjoying their keli leela. She adresses bihari bihariniji and tells them oh ! Bihariji the way you are chatting, laughing , playing and meeting each other today, it is giving me imense pleasure to my eyes Both of you are so engrossed playing togeter and he sound of your ornaments are making sch a lovely sound making me feel all the more happy. I love to watch you both in this playful mood when you look at each other so lovingly. Your meeting is just like the eeting of ghan and damini i.e. clouds and lightening. This is a blissful sight for me.
पद 33----अद्भुत गति उपजती अति नृत्यत, दोऊ मंडल कुँवर किसोर ...सकल सुगंध अंग भरी भोरी पिय नृत्यत , मुस्किन मुख मोरी परिरम्भन रस रोरी ....ताल धरें बनिता मृदंग चन्द्र गति घात बजै थोरी थोरी ....सप्त भाइ भाषा विचित्र , ललिता गाईं चित चोरी ...श्री वृन्दावन फूलीं फुलियो पूरण ससि, त्रिविधि पवन बहे थोरी थोरी ...गति विलास रस हास परस्पर , भूतल अद्भुत जोरी ...श्री यमुना जल विथकित पहुपनी वर्षा ,रतिपति डारत त्रीन तोरी ...श्री हरि दास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी , कौं रस रसना कहैं को री ........................पद ==३३-अर्थ ==-निकुंज में श्यामा श्याम जू विराजमान सखियों के संग सेवित हो रहे हैं ,कोई सखी चंवर डुला रही है , कोइ बीड़ा यानी पान खिला रही है , कोइ वीणा बजा कर सुरीली आवाज़ में गा कर उन्हें रीझा रही है इत्यादि . .सख ियन अपनी अपनी सेवा में कुशलता से वा सावधानी से अपने अपने तरीकों से उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश में हैं . इतने में एक सखी दूसरी सखी से बोली ---अरी सखी देखो तौं जर्रा !! बिहारी जी वा बिहारिनी जू फूलों में कैसे सुसज्जित हो रहे हैं |बसंत ऋतू में नए नए अंग अंग फूल रहे हैं और शरद ऋतू में पूरणमासी का चंद्रमा प्रिया जू के मुख को प्रकाशमय बना के जगमगा रहा है |तीन प्रकार की शीतल सुगंद मंद मंद चल रही है |यमुना जल के दोनों किनारे गौर और श्याम इनको मिलने का सम्बन्ध बाँध रहे हैं .|दोनों गले में बाँहें डाले ही कितना सुन्दर नृत्य कर रहे हैं .घन दामिनी दोनों के रस की वर्षा कर रही है .|दोनों के अंग अंग में कंचन के मणि जड़े हुए हैं |ललिता सखी चारो ओर गान कर रही है .और नव नव लाड लड़ा रही है ..|एक सखी उनसे कहा रही है ---हे ललिते सखी जू ! देखो तौं , दोनों पिया -प्रिया जू के अंग अंग मिल रहे हैं और यह ऐसा विचित्र नृत्य कर रहे हैं . |मानो चंद्रमा का विकास हो रहा हो .दोनों अपने आप को भूल गयें हैं .और कोइ सुध बुध नही है ..|संगीत में चन्द्र गति ही बज रही है . |जैसे चंद्रमा धीरे धीरे बढ़ता है , उसी प्रकार राधा जू का नृत्य की गति धीरे धीरे बढ़ रही है . | सप्त सुर जो है उसी की भाषा में राधा जू मधुर मधुर स्वर में जब गाने लगती है तौं दोनों का चित्त चुरा लेती है | श्री वृन्दावन रुपी दोनों के तन अंग हांफने से फूल रहे हैं . | लाडली जू का तौं मुख पूओर्निमा के चन्द्र जैसा है , परन्तु चन्द्रमा तौं कलाहीन है .हमारी राधा जू तौं 64 कला सम्पूर्ण हैं .| विहार में धीमी धीमी मृदु पवन यमुना जी के दोनों तटों के नाई[तरह ] दोनों को मिला रहे हैं .| सुरती विलास में जो जो अंग -अंग में गति उपज रही है सो रस बिहारी प्रिया जू हंसती हैं .| दोनों की इस में होड़ा होड़ी चल रही है यह जोरी भूतल पर अत्यंत अद्भुद जोरी है .| इस रस में दोनों मगन हो कर अक दुसरे को गले से लगा रहे हैं .| स्वामी श्री हरि दास जी कहतें हैं की इस आनंद वर्षा का ऐसा कौन है जो वर्णन कर सकता है .| श्री हरि दास 
.33.-----adbhood gati upjat athi nrityan ----- It is spring time in the nikunj mahal and new flowers have bloomd filling the air with their scented aroma all over the surroundins. The sakhi’s who are also there, doing sewa of the duo are enthralled to see the beauty of the wintry full moon which is illuminationg the whole place specially Priya ji’s face. Three varieties of breeze is blowing which is very cool and soothing. The banks of yamunaji on both the sides seem to be representing bihari bihariniji. The dark colour of the water and the white sand of the banks. Both are looking soenhaning in their posture of being in each others arms . It seem they re studded with priceless gems all over.One sakhi is telling sakhi Haridasi : sakhi see how lovely the duo is loking playng new keli leela’s and just see them dancing whih is so unique that they get lost in each other. This jori is only of its own kind in the whole univrse. Swami sri haridas ji says: Who can describe the beauty of the nectral rain coming from the two megh and damini.
पद ==34====प्यारी जू जब जब देखौं तेरो मुख तब तब नयों नयों लागत ऐसे भ्रम होत मैं कहूँ देखि न री दुति कौं दुति लेखनी न कागत...कोटि चन्द्र तैं कहाँ दुराये री नये नये रागत श्री हरि दास के स्वामी स्याम कहत काम की सांति न होई न होई तृप्ति रहौं निसी दिन जागत ..........................अर्थ 34----- राधा जी का बिहारी जी से अंतर गूढ़ प्रेम है जो की बाहर प्रकट नही होता है , जबकि बिहारी जी प्रेमातुर रहतें हैं और उनके नैनो से तथा अंग अंग में आतुरता दिखाई देती है .......लाडली जी लाल जी को अपने प्राणों से भी अधिक प्रेम करती हैं और उनका मन चाहा करती हैं , परन्तु नव दुल्हिन के लाडले स्वभाव के कारण वह लजीली है ऐसे लगता है कि वह मान कर रही हैं .,,जब की ऐसा नही है..निकुंज महल में दोनों लाल जू व लाडली जू बैठे हुए हैं और सखियन उनकी केलि लीला का अवलोकन करती हुई निहाल हो रही हैं लाल जू लाडली जू से बोले ------हो राधे जू !! जब मैं आप का मुख देखता हूँ तो क्षण क्षण में मुझे यह नविन ही दीखता है ....ऐसे लगता है की मैंने पहले आप को कभी इतनी सुन्दर देखा ही नही ...ज्यूँ ज्यूँ मेरी केलि विलास की चाह बढती जाती है , प्रसन्नता में मुझे आप का मुख नया नया लगता है,,,जब आप मान करती हो , तब रूखाई में भी आप का मुख नया दीखता है तो प्रसन्नता में तो और भी नया दिखेगा ...मुझे ऐसा भ्रम होता है की मैंने पहले आप की यह शोभा देखि ही नही है . यह शोभा की भी शोभा हीं है ..यह ना तो जानने में आती है , ना हीं लिखने में .../श्री हरिदास
 34-----Piyari ju jab jab dekho tero mukh tav tav nayo nayo laagat---In the nikuj mahal the divine couple is seated on a beautiful throne chating and joking with each other. Lal ji tells Radhaji Every time I see you , I feel I amseeing you for the first time.Your face looks new to me. I always have doubts whether I have seen you before ir not. When you get puffed upyou look different, when you are happy of oure you look very beautiful. Your beauty is out of he universe which is indescriable and can not be ritten by any one. Swami sri Haridas ji says oh shyama shyam the more I look at your aces and keli leela , the more I want to go on seeing. I don’t get satisfaction hence want to o on and on looking at you both and want to awake all the time.
पद्य --३५ --ऐसी जिय होत जो जिय सौं मिलै, तन सौं तन समाई लैहूँ तौं देखौं कहा हो प्यारी तोही सौं हिलगि आँखें आँखिन सौं मिली रर्हें... जीवत कौं यहै लहा हो प्यारी मोको इतौ साज कहा री हौं अति दीन तव बस भुव छेप जाए न सहा हो प्यारी . स्वामी हरि दास के स्वामी स्याम कहत राखी लें री बाहू बल हौं बपुरा काम दहा हो प्यारी .....................अर्थ ------------पद्य ==३५--मनोहर कुञ्ज सदन जो की सुख की राशि है , जहां प्रिया-प्रियतम की मोहिनी जोरी सेज पे शोभा दे रही है और साथ में श्री ललिता -श्री हरिदासी सखी सुन्दर रत्न जटित चौंकी जो की फूलों से सुसज्जित है , उस पे विराजमान हैं .| लाल जू लाडली जू से यह वचन बोल रहे हैं जो सभी सखियन बहुत ध्यान वा चाव से सून रही हैं .===हो प्यारी जू ! तुम तौं सहज ही मेरा मन हरती रहती हो .| तुम्हारे जैसी प्रेम प्रवीण , सुघर सिरोमणि जान , मन , कर्म वा वचन विलासिनी मैंने आज तक ना देखि है ना सूनी है .| तुम मेरे तन मन में बसी हुई हो | तुम बिन मेरा अन्य कोइ हो ही नही सकता .| तुम मेरा जीवन धन वा प्राण हो .| मेरा तुम्हे देख कर ऐसा जिय होता है कि,, की मेरा जिय तुम्हारे जिय से मिल कर एक हो गया है .| मेरे तन में तुम्हारो तन समा गया है ,तुम्हारे चन्द्रमा से मुख देख कर मैं चकोर की तरह पान करते करते कभी नही अघाता .| हो प्यारी जू मेरी आँखें तौं तुम्हारी आसक्ति वाली आँखों को देखती रहना चाहती ही हैं | मेरे जीने का एक यही लाभ है हो प्यारी ...जब तुम मान की संभावना से अपने नैन तिरछे करती हो , तब मेरे तन मन में से मानो प्राण ही निकल जातें हैं .| जब तुम प्रसन्न होती हो मैं तो तभी जीवित रहता हूँ .| ओह प्यारी जू मुझ में इतन I सामर्थ्य नही है या योग्यता कहाँ है कि तुम अपनी कृपा मुझ पर करती रहो ? मैं तो दीन और तुम्हारे विरह में व्याकुल रहता हूँ परन्तु आप तो बेपरवाह हो | जब तुम अपनी पलक रुपी आँचल को छूपा लेती हो तो मेरा मन अति अकुला सा जाता है .| हे प्यारी जू मैं तो बावला यानी बेचारा दीन वा काम युक्त हूँ | आप कि शरण में हूँ .......श्री हरि दास के स्वामी स्यामा , तब श्याम कहतें हैं कि मैं तों काम के कारण जला हुआ हूँ अब तुम ही मुझे संभालो .| .............................तब प्रिया जू ने व्याकुल -विरह श्याम सुन्दर जी के नैनो से नैन मिलाये और मुस्कुराते हुए बोली ==हो पिया ! मैंने कब मान कियो है ? तुम तों मेरे प्राण हो .| मेरा जीवन भी तुम्हारे साथ ही है .| यह सून कर सब सखियन अति प्रसन्न हुई और उनकी बलैयां लेने लगी .|श्री हरि दास35----- eise jyae oth jo jyae soun jyae mile---- In The niknj mahal in the presence of sakhi haridai the divine couple is in a blissful state of mind. Lal ji is telling priyaji that when we both meet together then I feel I am lik a chakor looking at the moon . My eyes are unable to take of f my eyes from your face.That is the purpose of my life therefore plese always remain in a happy mood with me. Ican not bear it when you getpuffed up and stop talking to me. Oh ladliji I do not haveth qualifiations that you bestow your kripa on me, I am only a simple unqalified person who is always at your disposal for your compassion for me . I am always eager for your blissful kripa but you you most of the time are in an angry mood and your eyebrows are always showing anger. Oh my dearest , I am not able to bear this behaviour of yours. Swami sri haridas ji says Lal ji tells Ladliji please priya ji do not behave like this and have compassion for me.
पद्य 36----- आजू रहसि में देखियत प्यारी जू एक बोल मांगो जो लिखि देहु साखि तेरे नैन दसन कुच कुच कटि नितम्ब जौं लिखि देहु प्रीति द्रव्य ब्याज परस्पर मन वच क्रम जो लिखि देहूँ....श्री हरि दास के स्वामी स्यामा प्यारी पै बोल बुलाय लियो लिखि देहु ....................................................अर्थ ==पद=३६ ==नव निकुंज सुख पुंज महल जहाँ सुन्दर सुख सेजिया पे प्यारी --लाल बैठे हुए हैं .| आज तों लाडली जी चंचल व रंगों से भरी हुई हैं . जो बात पिया जू बोल रहें हैं सब प्रसन्नता से मान रही हैं .| महा अद्भुत श्रींगार किये श्री हरि दासी जू भी अति सुन्दर आसन पर शोभित हो रही हैं .| आज प्यारी जी की प्रसन्ता देख कर बिहारी जी उन से बोले --- हो प्यारी जू ! तुम तों अति कृपालु हो , रसाल हो . मुझे अपनी भुजाओं में लेती हो | आज तुम से एक बोल मांग रहा हूँ .| तुम लिख कर यह वचन दो मुझे .| प्रिया जू बोली = -- हो प्यारे ! क्या मांगते हो ? तुम जो भी मांगोगे मैं तुम्हे जरूर दूंगी .| तब कुञ्ज बिहारी जू बोले =-- राधे आप यह लिख के दो की तुम मुझे अपनी प्रीति रूप धन सदा देती रहोगी .और यह भी लिख दो की मैं इसी भाँति हमेशा प्रसन्न रहूंगी और कभी भी मान नही करूंगी ...और रूचि का ब्याज दोगी जिससे प्रीति रूप धन बढ़ता ही जाए ...तुम गर्वीली हो .घड़ी--घड़ी में रूठ जाती हो | हे राधे जू ! इस लिखे हुए ख़त में मुझे साक्षी या गवाही भी चाहिए की तुम हमेशा यह सुख मुझे देती रहोगी .| ललिता -हरिदासी यह सुख की साक्षी है , तुम्हारे नैन व सभी अंग भी गवाह हैं की तुम फिर कभी मान नही करोगी .|श्री हरिदास जू के स्वामी स्यामा जू तब लाल जू से बोली --- ठीक है , लिख देती हूँ की कभी मान नही करूँगी ...श्री हरिदास .
 36------ Aaj rahesi me dekhat pyari ju----- In the nikunj mahalpyariji and Lalji are seated on a seat decorated withflowers. That time Lalita sakhisays, today pyariji is in a very good chirpy mood as I can see from her face as well as actions.Oh Ladliji I want you to promise me something in written.” Ladliji was taken aback and wondered what it could be and agreed to promise her to give in written what ever she wanted. She said , ‘Bihariniji I want you to goon loving Bihariji always. This love of your’s for him is much more than all the riches of the world. Your affection for him is much more than the interest on this wealth. This wealth in the form of your affection will go on multiplying. You must give in written that you will not get puffed up and make him miserable.I YOUR SAKHI Haridasi will be witness to make sure that you keep Lal ji always happy. If you are angry with Lalji again the sakhi will pay for it so please keep your mood cheerful and happy always.
पद्य 37--- प्यारी तेरी बौफिन बान सुमार लागे भौंहें ज्यूँ धनुष एक बार यौं छूटत जैसे बादर वरसत इन्द्र अनख और हथियार कौं गानि री चाहनि कनक श्री हरि दास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी सौं प्यारी जब तू बोलत चनख चनख ...................अर्थ ----पद्य ----37---सुन्दर नवल निकुंज में दोनों बिहारी बिहारिनी जू सुन्दर सेज पर विराजमान हैं .| आज राधा जी बहुत प्रसन्न लग रही हैं .| बिहारी जी से अच्छी अच्छी बातें कर रही हैं .. बिहारी जी बार बार उनको देखते जातें हैं . जैसे की उनको विश्वास ही नही की आज इतनी खुश कैसे लग रही हैं .| तब वह बोले ----हो प्यारी जू ! आज तुम बहुत प्रसन्न वा खिली हुई सी दिख रही हो ,. मुझे बहुत भला लग रहा है .| तुम क्यों मुझ दीन को क्यों इतना परेशान करती हो ? मुझे तुम से कितने निहोरे करने पडतें हैं .| तुम बीच बीच में अपनी तिरछी भौहों से ऐसे देखती हो जैसे धनुष हो और मेरे उपर बाण छोड़ने को तैयार हो .|तुम्हारी तिरछी चितवन मुझको ऐसी प्रतीत होती है जैसे महाजोर से बादल बरसतें हैं .|तुम मुझे काम कसौटी में क्यों कसती हो ?कभी तो तुम इतनी खुश वा चंचल लगती हो और कभी तुम्हे मालुम नही क्या हो जाता है की एक दम चुप ही हो जाती हो ....एक सखी जो यह सून रही थी बिहारी जी के पक्ष में बोली ----लाडली जू तुम जरा बिहारी जू की दशा तो देखो कितने श्रमित हो रहे हैं .और आप की मनुहार करते हुए कितना श्रम लगातें हैं .आप की हा -हा खा रहे हैं तब पिया जू फिर से बोले ---हो राधे ! जैसे बादलों के अंग अंग से रस की वर्षा हो रही है उसी प्रकार तुम भी रस बरसाओ ..मुझ पर इतनी तो कृपा कर दो . तब बिहारी जी फिर से लाडली जी को बोले =--हो लाडली जू ! जैसे बादलों के अंग अंग से रस की वर्षा हो रही है , ऐसे ही रस की वर्षा मोपे करो,, तुम रस में रहती हुई कितनी अच्छी लगती हो ,.ऐसे ही रहा करो ... तुम्हारी आँखों की कोर से तुम्हारे तिरछे नजर से मुझे देखने से बहुत डर जाता हूँ .| श्री हरि दास के स्वामी स्यामा ! तुम कुञ्ज बिहारी स्याम महा डरपोक वा व्याकुल हो .|.....हे लाडली जु ,जैसे बादल चिढ़ कर बरसते हैं ,वैसे हीं तुम्हारी भौंहें क्यों चिढती हुई हैं ?/लाडली जू जब तुम चनख चनख यानि चिढ़ कर या नाराज़ हो कर लाल जी से बोलती हो तब यह बहुत निराश वा दुखी हो जाते ही हैं .,,,आप के बलिहारी जाती हूँ इन को रस के झूले में बिठा के झूला दो..,हरिदासी सखी के समझाने से राधा जी का मान समाप्त हुआ और वह बिहारी जू के साथ केलि लीला में एक बार फिर मग्न हो गयी ..श्री हरिदास .
पद्य --३८ ..38===काहे ते आजू अटपटे से हरि लटपटी पाग अटपटे से बंद, अटपटी देत आगे सरि,,,अटपटे पायिं परत ने परखे जब आवत हे इत ढरि,,श्री हरिदास के स्वामी स्याम जानि हौं पायें आजू लाल औरे परि..//////अर्थ ===३८---महा मनोहर निकुंज में सखियों के सामने जब प्यारी जू ने लाल जी को वचन दिया की वह लिख के देंगी की अब कबहू नही रूठेंगी , तब बिहारी जू अत्यंत खुश हुए ...बिहारी जी बोले = -- आज तो लाडली जू आप प्रीति रूप धन कागज़ पर लिख दो , तुम्हारे नैन ही साक्षी दे देंगे . प्यारी जी बोली ---- लिख देंगे लिख देंगे , .फिर लाडली जू ने विचार किया की यह मुझ से कपट तो नही कर रहे ? इनकी आदत तो विचित्र है .| यह नटखट , अनोखे वा शरारती हैं ..यह सोच कर राधा जी बोली ---- तुम लिखित में क्यों मांग रहे हो ? मैंने तुम से कब मान किया ? हो हरि तुम आज बहुत अटपटी बात कर रहे हो .,,तुम्हारी लटपटी यानी ढीली पाग ढीली ढीली और सरकती हुई और अव्यवस्थित है .जब देखो तुम लडखडाते रहते हो . हमेशा अस्थिर रहते हो .,मैंने जब भी तुम्हे देखा है , तुम अटपटी हरकतें करते हो .|कोइ ना कोइ बहाना बना के कभी मेरे चरण पड़ते हो , कभी कुछ ..सच सच बताओ की तुम ऐसे क्यों करते हो ?श्री हरिदास जू के स्वामी स्यामा की आज लाल जी के मन में किस भाँति का रास विलास चल रहा है ? चलते चलते चौंक जातें हैं . मन में क्या है ?तब राधा जी को भान हुआ की उनके चरण नृत्य करने को मचल रहें हैं .तब सब सखियों ने नृत्य क I तैयारी करी और उनके साथ नाचने लगी . सभी होली के नाच में निमग्न हो गए जब सब परस्पर हो कर होली की धूम मचाने लगे तो सखियाँ दोनों की बलिहारी लेने लगी ,.अब तो नैनो में अबीर -गुलाल लिए आज मन की इच्छा पूरी हुई .दसों दिशाओं में नगाड़े ,बाजे बजने से वातावरण गूँज उठा . सो हो हो हो होली है की ध्वनि चारों और सुनाई देने लगी . श्री हरिदास
 38. Kaahe te aaj atpate se Hari----- In the nikunj mahalwhere the jori is seated on a beautiful throne made out of lovely flowers, Ladliji comments, ‘Oh Biharji why are you saying things which make no sense? You are wearing you turban or paag insuch a shabby manner. You should not talk to me like this. Do not show your smartness to me because I have come to know that you are a fraud when you came to touch my feet. Why do you talk in suh a weird manner?’ Swami sri Haridas ji says that Ladliji is not able to understand that Lalji wanted to dance with her. When Lalita sakhi explained to er what Lalji wanted, she agreed to play holi with him.
पद्य ---३९ -==39===--काहे कौं मान करत मोहिब कत दुःख देति,,बासे की सी दृष्टि लियें रहों तेरी जिवनि तोही समेति,,अब कछु ऐसी करो जू भौह्नि टाटी जिनि देहु कहत इति नेति श्री हरिदास के स्वामी स्यामा,छल कै गरे लगाइ भयी रमेति ..............अर्थ --पद्य --३९==निकुंज महल में फूलों से सजी हुई सेज पर दोनों प्रिया= प्रियतम की जोरी विराजमान हैं .. उसी समय लाल जू ने प्रिया जू को ये वचन बोले ===.राधे जू ! आप मुझ से बोलती क्यों नही हो ?.यह मुझे मालुम है की गर्व करना तुम्हारा स्वभाव है , परन्तु आप मुझे क्यों दुखी करती हो ?.मुझसे आप प्रसन्न रहा करो...एक सखी ने भी हां में हां मिलाते हुए प्यारी जू से बोला की सही कह रहें हैं बिहारी जी .,,...लाडली जू आप काहे को बेकार में गंभीर हो जाती हो ? बांसी एक पक्षी होता है , वोह अपनी बांसी से बहुत स्नेह करता है .बांसी उसकी प्रसन्नता में ही दृष्टि रखती है ऐसे ही मैं तुम्हारा बांसो हूँ और तुम मेरी बांसी ,उसकी तरह तुम भी मुझसे प्रसन्न रहा करो .| तुम्हारे साथ ही मेरा जीवन है .और यह जीवन तुम्हारी प्रसन्नता के लिए ही है .| तुम्हारी कृपा ही मुझे चाहिए , जिससे मेरा मन प्रफुल्लित हो जाता है वा रोम रोम खिल उठता है .हो प्यारी जू ! अब ऐसा कुछ करो की यह आपकी चढ़ी हुई भौंहें मेरी तरफ ऐसे ना देखें .मेरी विनती मानिए और श्रवण से सूनिये मेरे सन्मुख होकर बात कीजिये ,,| श्री हरिदास जू के स्वामी श्यामा जू ने श्याम को छल करके खा ----सखी लाल जी को तो खबर नही है और तू ऐसे ही बीच में क्यों बोल रही हो ?तब सखी मुस्कराती हुई वहाँ से गयी और आशीष दी की तुम्हारी यह नोक झोक ऐसे ही सदा चलती रहे जिससे प्रेम का विस्तार होता जाए ....श्री हरिदास

39 pada ....kaahe kou maan karat...... In the beautiful nikunj decorated with flowers of great variety , the divine couple are surrounded by sakhi's who are always ready to help the divine couple to pursue their keli leela without any disruption. Radhaji gets into different bhaawa's and Bihariji always mistakes it that she is having attitude. In this pada when Radha ji is exceptionally quiet , Lal ji cannot accept it .He wants that both should go on and on chatting and sharing glances at each other. In this pada he feels miserable when Radha j is not talking to him and is in her dhyaan mudra. He lamnates before her and says ..Oh Radley please tell me why do you suddenly start ignoring me ? Your moods keep changing and I feel as though I have made some mistake.your glance from your eyes looks as though you are very angry with me. You know it that I cannot tolerate even a second if you are angry with me. Why do you make me unhappy ? Please I request you to be always kind and compassionate with me .Why do you become so serious ?Another sakhi who is also listening to Bihariji also confirms with him and says what bihariji says is absolutely correct. She says oh ! Ladliju ! you know Baansi is a loving bird who is always making love to his baansni (wife) In return she too loves him so much that she too keeps him so happy and we both are like these loving birds . So you also should always love like the bansni bird. Bihariji says , I don't want anything else except your compassion and love for me. When you adore me my heart jumps a leap and I become overwhelmed and intoxicating. Please do something about your eyebrows which are so high as if in anger . Please straighten them I request you to listen to me and talk to me lovingly. Lalita sakhi who is also swami hari das ji is listening to this conversation which is very common in all love birds and tells the sakhi who had intervened , shyam sundar does not even know what you are saying so why are you talking between them. Then the sakhi smilingly left the nikunj saying bless the divine couple who are always engrossed in their love with these kind of moods which are not new. This way Radha krishna are always enjoying the bliss of keli leela in the nikunj mehal.
पद्य ==४०==40=रोम रोम रसना जो होति,,,,,,,,,तौं तेरे गुन न बखाने जात...कहाँ कहो एक जीभ सखी री ,बात कि बात बात .....भानु श्रमित और ससि हूँ ,,श्रमित भये और जुवति जात ,,,,,,,श्री हरिदास के स्वामी कहत री प्यारी ,तु राखत प्रान जात.........................................==40==पद्य ==४० का अर्थ ....सुन्दर कमल निकुंज में बिहारी -बिहारिनि जु अति कोमल गुलाब की पंखुड़ियों से सजी सेजिया पे बैठे हैं ..दोनों महानंद में छकी रहें हैं .| लाडली जू को आज कृपालु जान कर लाल जी हरि दासी सखी को देखते हुए यह वचन बोले ==.हे प्यारी जू ! यदि मेरी रोम रोम भी रसना होती यानि हज़ारों जिह्वाएँ होती तब भी तेरे गुणों का बखान नही कर सकता .|तुम्हारा नवीन प्रकार से विलास , नैनों से नैन जुड़े हुए प्रेम भरी चितवन वा सुन्दर वचन सून कर मैं आश्चर्य चकित हो जाता हूँ .| सूर्य की प्रीति कमल के फूल से है , जब सूर्य उदय होता है तब फूल खिल जाता है और जब सूर्य डूब जाता है तब कमल भी मुरझा जाता है .सूर्य तो हमेशा यह ही चाहता है कि वह नित्य अपने स्नेही को सुख दे , फिर संध्या को अस्त क्यूँ होता है ?इसी प्रकार चन्द्र की प्रीति चकोर से होती है , जो रात को ही एकटक लगाए चंद्रमा को देखता रहता है ..जब प्रातः होता है तब चंद्रमा अस्त हो जाता है..तब वह भी अपनी स्नेही का मनोरथ पूरा नही कर सकता //ऐसे ही मेरा चित भी श्रमित है .मेरा मन तो सूर्य के समान दहक रहा है ,चित चकित बंद है ,और बुद्धि रुपी युवती सर्व श्रमित है . आप तो इतने कृपालु हो कि मैं आप के गूणों को गाने में असमर्थ हूँ ./श्री हरि दास जू के स्वामी स्यामा प्यारी श्याम जू कहते हैं = हो प्यारी जू आप ऐसे ही मुझसे खुश रहा करो वरना मेरे प्राण ही चले जातें हैं ..कभी मान नही करना ./यद्यपि मैं आपके गूण- गान करने में असमर्थ हूँ , सो आप मेरे प्राणों के प्राण हो . तब भी तुम ने मुझे अपना लिया है ..श्री हरि दास
40.---- Rom Rom Rasna jo hoti tau tere guun na bakhaane jaat---In
the nikunj mahal both Lalji and Ladliji were seated and Lal ji tells Ladliji, ‘priya ju I have no words to praise you qualities. Even if every cell of my body had been the tounge, I would not have been able to describe how you make me happy in the keli leela. Oh sakhi ! I have only one tounge and what can one tounge describe? I am a failure to describe your good qualitites and I don’t know what and how to express my self about you. The lotus blooms only as long as the sun shines. Although the sun rediates so much heat but still it feels pleased to see the lotus bloom, but it has to set by evening and feels miserable. The same when the moon shines thechakor bird is delighted and keeos staring at it but when the moon sets down in the morning it has to bear the brunt. Swami sri haridas ji says Oh Priya ju you love and affection can only give me true happiness. (COURTESY:ASHA BHARDWAJ)


HARIDAS KELILILA (21 to 30)(Haridas bhajan 4)

HARIDAS KELILILA (21 to 30)(Haridas bhajan 4)













पद --21जोवन रंग रँगीली सोने से गात ..धरारे नैना कंठ पोत मखतूलि.............अंग अंग अनंग झलकत सोहत कानिन दीरें....सोभा देत देखत हीं बने फिरैं जों सी फूली ,,,तनसुख सारी लाही अंगिया अतलस अतरौता....छवि चारि चारि चुरी,,पहूँचिन पहुँचि खमकी बनि...नकफूल जेब मुख बीरा...चौक कौंधेइ समभ्रम भूलि ऐसि नित्य बिहारिनि सेइ बिहारी लाल संग अति आधीन आतुर लटपटात जियु तरु तमाल..कुञ्ज महल हरिदासी जोरी सुरति हिंडोरे झूली .... अर्थ पद-21 ...नवल रँगीली अदभुत कुञ्ज ,जहां सहज हीं फूलों की रचना से सुन्दर सेज ती शोभायमान हो रहा है ,,,उस सेज पर श्री हरिदासी जी की लाडली जोरी श्री बिहारी जी बिहारिनि जू झूला झूल रहे हैं ..यह सुख हरिदासी जी सुन्दर फूलों का श्रृंगार किये और सखियों के संग देख कर अति प्रसन्न हो रहे हैं ..वह उन सखियों से कह रही हैं ====सखी ,,आज तो निकुंज में अदभुत सुख जो कि आनंदित करनेवाला है ,बह रहा है ,यानी कि बरस रहा है ..नए नए भावों का रंग से जिस अंग में रँगीली ,एक अनुराग ही की मूर्ति बनि हुई है ..द्रवित होने वाले नैनों में रंग भरा है ,कंठ में कल मुख मुलि,या रेशमी फंदा ,,,जो की श्याम जी की बाजु है .कितना फब रहा है .अंग अंग अनंग झलकते हुए कानों के कुंडल कैसे शोभा दे रहे हैं ,,,यानि की दोनों मेंमिलन की चाह झलक रही हो ,,प्यारी जू के अंग पिया जू के अंगों को शोभा दे रहें हैं ..यह शोभा तो देखते ही बनती है ,,,...सखी ,,देखो तो ! चांदनी में चाँदनी सी फूल रही है ,,यहाँ तो फूल हीं फूल की बात जाने ,,,.प्रिया जू का फूलदार कपड़ा वा मल मल साड़ी और लाल रंग की अंगिया कैसी प्रकाशमान हो रही है .?? प्रीतम ने प्रिया जू को ऐसे रखा है बिहारी जी की अँगुलियाँ बिहारिनि जू कि हाथों कि चार चार चूडियाँ बन गई हैं ...उनके नाक से जो साँस आ रही है ,मानों फूलों की अति सुन्दर सुगंध हों ,,मुख बीज यानी पान का बीड़ा हो ..आगे चार दातों की पंक्तियाँ जो बिजली की भांति चमक रहे हों उनकी चाह मानों बरसते हुए बादल ...जे सखियों देखो तो ,बिहारी जू बिहारिनिजू केली में इतने मगन हैं कि उनमे उमंग और उत्साह झलक रही है .,करोड़ों कामदेव भी प्यारी जू के एक रोम की चाह पर वार डालूँ.....जरा देखो तो दोनों का अस्थिर हो जाना .मोहित हो जाना ,,इत्यादि ऐसा लग रहा है कि तरु तमाल पै कंचन कि बेली लिपट रही है ...अहो हरिदासी जू !यह दोनों के अंग अंगिन कि जोरी सुरति के हिंडोरे में कैसे अंग अंग मिलाकर झूलते हुए अलौकिक लग रहे हैं ..श्री हरिदास ..
 21..----jowan rang rangini sone se gaat---------------In the beautifully decorated nikunj the couple were seated on a throne decorated with all variety if flowers which were givinga pleasant sweet scent . Haridasi ju was full of pleasure in seeing the two swinging on the jhoola. She adressed the other sakhi’s who were also watching them and said , sakhi’s just look at the unique kelli of today. It seems, that pleaure is coming in the form of rain. I can feel new experience of colurful youth in the couple. Radha ji seems to be a beautiful sculpted goddess of love. Her eyes are so enchanting as though filled with multicolours. The black velvet like necklace which is actually the arm of shyam sundar is looking so beautiful. The dress made out of flowers that biharniju is wearing is glittering so well and shyam sundar ji is fingers are tightly holding shyama’s wrist that they have left marks on the wrist, it seems that she is wearing bangles. The breathing coming from Bihariji seems like a scented flower. The paan which he is chewing looks like clouds and his front teeth are looking like lightening. Both are so much engrosses in their kelli leela that it seems thata golden creeper is covering the trunk of a tree. Indeed they are looking so unique and enchanting.

पद --२२ --राधे दुलारि मान तजि ..प्रान पायो जात है री सजि......अपनौं हाथ मेरे माथे धरि....अभे दान दे आजि,,,,,श्री हरिदास के स्वामी स्याम कहत री प्यारी रंग रूचि सौं बलि लजि.................... ............22==पद =२२ ...का अर्थ ==मनोहर निकुंज में दोनों आनंद में मग्न नयी सेज पर विराजमान हैं ,,इतना में लाल जी को एक बार फिर से भान हुआ कि प्रिया जू मान कर रही हैं ..तब वह उनसे बोले --हे राधे ,,तुम् दुलारी हो .मान को तज दो ,,क्योकि मुझे तुम्हारी गर्व भरी चितवन से डर लगता है ,,,,हे ,प्यारी! ,मुझसे हठ मत करो .,तुम् मेरे मनाने पर भी क्यों नहीं मानती ??तुम्हारी प्रसन्नता पर हीं मेरे प्राण जीतें हैं ,,तुम्हें महा प्रसन्न देख कर हीं मेरे प्राण पुष्ट होते हैं .,आपके समान तीनों लोक में कोई नहीं है .और ना तुम्हारे जैसे गुणों वाली है ,ना ही रूप वाली ,ना ही निपुण ,मैंने देखी है ना ही सुनी है ,पाताल लोक तो तुम्हारे चरण हैं ,भूलोक मध्य भाग ,[हिय कमल ]सुरलोक --उपर आपका कमल जैसा मुख !....मैं आपकी कृपा से मोहन कहलाता हूँ .परन्तु मैं आपकी बराबरी किसी प्रकार नहीं कर सकता ...........श्यामसुन्दर जी कहते है -----हे प्यारी जू ! तुम्हारी भी तो केलि रूचि है !...,मैं बलिहारी जाता हूँ कि आप खुशी खुशी प्रसन्नता से मेरे संग विहार किया करो .. हरिदासी सखी ,जो ये वार्तालाप सुन रही थी ,बोली --हो प्यारी जू !यह प्यारे तो तुम्हारे हित में क्षण क्षण तुम्हारे में हीं चित्त को लगाये रहते हैं ..तुम् बिना कोई दोष हीं क्यों मान करती हो ?यह वचन सुनकर राधे जू को अपनी गलती का भान हुआ और वह बिहारी जी से बोलीं----पता नहीं मुझे क्या हो जाता है ,अनजाने में आपको दुःख दिया है ,,आगे से सावधान रहूंगी ,,इस प्रकार बिहारी जी को प्रिय वचन बोलकर उनको प्रसन्न किया ,यह युगल सरकार एक बार फिर से आनंद से सखियों से घिरे हुए ,केलि लीला में व्यस्त हो गए ,,श्री हरिदास ,,
22------Radhe dulaari maan taji--------In the beautiful nikunj the duo is seated and it looks as though Biharniji is puffed up. Bihariji notices that she is looking here and there and tells her oh radhe please don’t be in such a indifferent mood We both belong to the same nikunj and you also like to be in my company,then why do you behave as though you are annoyed with me. I really feel frightened when you turn so obstinate. Why don’t you remain happy with me. I haven’t seen any body so beautiful and full of so many qualities as you in in the three worlds. The pataal lok are your feet, the earth is your lotus like heart and the surya lok is your beautiful face. Although I am called Mohan but I can never compare my self with you. When Shyam Sundar ji was talking like this one sakhi who was also hearing everything made Radha ji realise that what he says is very true and she should get over her mood and play keli leela with him. At once Radha ji as though woken from sleep came and embraced Bihariji and both were in blissful moments. 
पद -23 --गुन की बात राधा आगे कौं जानै.........जो जाने सो कछु उन्हारे ....नृत्य गीत ताल भेदनि के विभेद जानै ..कहन जिते किते देखी झारि....तत्व सुध स्वरुप रेख प्रमान.....जे विग्य सुघर ते पचे भारि......श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी नैक तुम्हारी प्रकृति के अंग अंग और गुनि परे हारि,,........................
....अर्थ =23 =महाविचित्र कुञ्ज जिस में सुन्दर राग रागिनी हमेशा बनी रहती है ,दोनों बिहारी जी बिहारिनि जू सुन्दर सेज पर विराजमान हों बैठे हैं ..श्री हरिदासी जी भी फूलों का श्रृंगार किये फूलों के आसन पर विराजमान हैं ..आज तो फूलों के महल में निकुंज मंदिर आनंद से फूल रहा है ,,प्रिया जू और लाल जी ,ग्रीष्म के फूलों से सजे बहुत मोहक लग रहे हैं ,उनका हाव भाव सब कुसुमन[फूल जैसे ]हीं हो गए हैं ,,उनकी हर वस्तु फूलों से सजी हुई देखाई दे रही है..आज तो फूलों का हीं श्रृंगार भी किया है ,,,चाँदनी,पर्दा,तकिया.बिछौना.सेज डोरी आदि सब सुमनों से ही सजाई गई है ,,पूरा निकुंज महल महक रहा है ,शीतल मंद सुगंध पवन झोंका दे रहा है हरिदासी एकटकी लगाये ,इन दोनों को निहारती हुई ,राधा जी को संकेत करते हुए बोली====राधे प्यारी !तुमसे ज्यादा गुणों की बात कोई नहीं जानता...यदि जानते हैं तो बिहारी जी जानते हैं ,क्योकि वह आपसे ही तो यह गुन सीखें हैं ,,आपके गुणों का मुकाबला कौन कर सकता है ? कुञ्ज बिहारी भी जो कछु जानते हैं ,वह आपकी समानता हीं कर सकते हैं ,आप के अंग अंग में करोड़ों भाव आते हैं और आपके ताल या नाच के शब्द की ध्वनि और फुर्ती से ताल में ताल मिलाना ,यह सब नटनागर आपसे हीं तो सीखते हैं.अंग अंग की जरी ,चतुराई ,सुघराई ,उजराई.और कौन कौन से गुणों का वर्णन करूँ ??, आपसे बढकर और कोई अधिक कुशल नहीं या चतुर नहीं ,तुम् धन्य हो . श्री हरिदास के स्वामी, हो श्यामा !यह कुञ्ज बिहारी भले हीं विश्व का पालन करने वाले हों ,परन्तु यह टहल तो आपकी कृपा से हीं है ,,विश्व में तो आपका हीं प्रताप भरा पूरा है ...श्री हरिदास
 23------guun ki baat radhe tere aage ko jaane-----In the beautiful nikunj when all the sahchari’s were watching prya, pritam resting on a throne decorated by flowers , one sakhi tells another: oh Ladliji only kunj bihariji knows your skills and talents and no body else, because he has learnt them from you. It is only who can have millions of high bhav which no one can even think of. The way you dance does not match with any one. How fast your steps move with the rythem of the music.Nat Naagar bihariji who himself is known as the reatest dancer has learnt this art from you. You are talented in so many ways that I am unable to decide which ones should I mention.You are really superb and great. Swami sri Hari das ji says that although bihariji is known as the supreme sustainer of the whole universe, Ladli ji is indeed much above him. It is due to her full kripa on bihariji that he is known as the Lord of the universe.
पद ==24..सुघर भये हों बिहारी याही छाँह तें .....जे जे गति सुघर सुर जानपन्यों की .....ते ते याही बांह तें ..हुते तों अधिक बड़े सब ही तें ...पे इनकी कस न कहतात यह तें ...श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी जकि रहे चाह तैं....
.सुन्दर निकुंज महल में दोनों बिहारी बिहारिनि जू फूलों के सेज पर बैठे हुए है .क्षण क्षण में लाडली जू मानिनी वा गर्वीली हो जाती हैं ,,जिससे बिहारी जी आतुर हो जाते है ,और हरिदासी की ओर देखकर निवेदन करना चाह रहे हैं कि इनको कुछ समझाओ कि यह मुझसे रूठे नहीं .........हरिदासी जू राधा जू को कहती हैं ===अहो प्यारी जू !यह बिहारी जी कितने सुघर हैं ,यानी सुन्दर हैं .चतुर वा कुशल हैं ....वह इतने कुशल केवल इसलिए है क्योकि आप कीउनपर अति कृपा है ,,,,देखो तों बेचारे तुम्हे मिलने के लिए कितने छटपटा रहे हैं और एक तुम् हो जो यह बात को समझ हीं नहीं रही हो ,जब देखो मान कर बैठती हो ,,वह दीन होकर कभी चरण पड़ कर आपको मनाते हैं .,कभी कभी नैनो को छूते हैं और केवल आपकी कृपा की एक कोर ही तों चाहते है ...अतः तुम् अपना मान त्याग कर उनसे बात करो ..और उन्हें सुखी करो ...श्री हरिदास जी के स्वामी श्यामा यह तों आप के नाम की रट लगाए रहते हैं ..आप इनकी चाह को शीघ्र पूरा करो ...श्री हरिदास..
 24-----Sudhar bhyo ho bihari yahi chhan te----In the nikunj like usually Ladliji is again in one of her puffed up moods. Sakhi sri haridasi who is Lalita sakhi in the nikunj s also seated before them. When she notices kishotiji’s swollen face she utters the following words; “ Ladliji Bihariji is so perfect in so many skills beauty, inteligene. Infact he is an all rounder . All this is due to your kripa or blessings. See how miserable he is looking just because you have turned your face on the other side.He is trying to pacify you to calm down. See how he has kept your lotus feet on his knees .All he wants is your kripa so please change your mood and look t him with your compassion. May Kunj Bihari always continues to be with you in your keli leela.”
पद==25===पद===राधा रसिक कुञ्ज बिहारी कहत जू हो ....न कहू ग्यो सुनि सुनि राधे ,तेरि सौं मोहि न पत्यौ तौ संग हरिदासी हुति....बुजि देखि भतौ कहि धौ कहा भयौ मेरी सौं ......प्यारी तोहि गत्तोंद न प्रतीति छांड़ीं छिया....जानि इतनीब अरी सौं गहि लपटाई रहे छैल दौ , छाति सौं छाति लगाये फेरा फेरि सौं ..अर्थ---
-25==कुञ्ज बिहारी जी निकुंज में राधा जू के संग बात के रहे थे ,,,राधा जी से बोले ===राधा जू !मैं तुम्हारी शपथ लेकर कहता हूँ कि तुम् बहुत चतुर और भोली हो ..तुम्हारे साथ आज तक जो भी केलि विलास किये ,वह तुम्हारे सम्पूर्ण छवि औरतुम्हारे विहार कि शोभा ,मेरे हृदय में परछाईं की तरह सदा के लिए बस गई है ..मैं आपके चरण पड़ता हूँ कि तुम् मुझसे रूठा नहीं करो ,,,हरिदासी जी तों तुम्हारे संग हमेशा रहती हैं .तुम् उनसे पूछ लो ,कि क्या मैंने कभी भी अदभुत खेल खेला है ? तुम्हें मेरी शपथ है ,बताओ तों जरा ....................तब श्री हरिदासी सखी ने राधा जू को समझाया की प्यारी जू तुम् तों श्यामसुन्दर जी की नित्य दुल्हिन हो ......प्रिया जू प्यारे की तरफ देखो जो दीन हो कर तुम्हें मना रहे हैं ,,वह कह रहे हैं कि मेरा तों मन तुम्हारे एक रोम पर वारी है ..उनका तों मन हमेशा तुम् में हीं लगा रहता है ......श्री हरिदास जी के वचन सुनकर ,राधा जू का भ्रम दूर हो गया और लाडली जू ने लाल जी को आलिंगन कर गले लगा लिया और विहार करने लगे ...श्री हरिदास
 25------Radha rasik kunj bihari kehath ju----- In the nikunj Kunj Bihari tells Radha ji “Radha ji I wow upon you that you are so innocent and intelligent. It is you only who has initiated me into the keli leela How ever you want to perform the keli, I simply follow you. I am just like your shadow of you lovely body. I bow
at your feet and always pray that yu are in a good cheerful mood always and don’t get puffed up.Haridasi sakhi is always with us.You ask her what I have done to spoil your mood.” Hari dasi sakhi intervened and said Ladliji I am a witness to the fact that what Lalji is sayng is correct. What happens to your moods ? Why do you forget that you are the divine bride of kunj bihariji ? Just see his miserable condition you have put him in. Now cheer up and make him happy by your kripa. Radha ji who herself could not be puffed up or long smiled loveingly at bihariji and then the due were again talkng and laughing in the nikunj mahal.
पद ==26 ==प्यारी तेरि महिमा वरनि न जाय ,,,जेहि आलस काम बस कौं ताकौं दंड हमे लागत है री भय आधीन,,,,,,साढ़े ग्यारह ज्यों औंटी दूजे नव सत साजि सहज ही तामै जवादी कर्पूर कस्तूरी कुम् कुम् के रंग भीन..श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी रस बस करि लीन .......
. अर्थ ---26 -----स्वामी श्री हरिदास जी की रस रीति में श्यामा श्याम कुंजबिहारी जी की अनुपम जोरी का वर्णन कोई नहीं कर सकता ,कहने को तो दोनों के दो दिव्य तन हैं ,परन्तु इनके प्राण तो एक हीं हैं ,,इनकी सुन्दर छवि तो महा प्रेम सुख का सार हीं है हमारी लाडली जू तो सुकुमारी हैं ,वह प्रेम का पूर्ण स्वरूप हैं .बिहारी जी के चकोर जैसे नैन उनको निरखते हुए ,कभी अघाते नहीं है ,लाल जी के प्राणों में लाडली जू सदा वास करती हैं ,दोनों युगल जोरी का नाम .रूप .लीला और धाम अति मधुर है , जो बड़भागी इनके छवि का अवलोकन कर लें .उनके भाग्य पर तो देवी-देवता भी इर्ष्या करते हैं ,,........ऐसे हीं निकुंज में इनकी वार्तालाप चलती रहती है और सखियन देख देख कर बलि बलि जाती हैं ,,,एक समय निकुंज में सखियों से घीरे हुए बिहारी जी को लगा की राधा जू उनको अनदेखा कर रही हैं,,तब लाल जी ,प्यारी जू को यह वचन बोले ==होप्यारी जू !तुम्हारी महिमा का वर्णन तो मैं कर हीं नहीं सकता ,,,आपने तो मुझे अपने वश में किया हुआ है ,आपके साथ विहार करते हुए ,मुझे जितना आनंद आता है ,उसका भी मैं वर्णन नहीं कर सकता ,,हे लाडली जू !आप तो सुकुमारी हो ..आप आलसी क्यों हो गई हो ? आप तो गर्वीली हो ,,तुम्हें क्या मेरे संग रहना पसंद नहीं है ?,तुम्हारे गर्विलेपन से हमें दण्ड भुगतना पड़ता है ,.तुम् तो शुद्ध सोने की तरह सोलह श्रृंगार में ऐसी दिखती हो कि सहज में हीं कपूर ,कस्तूरी और कुम् कुम् की भीनी भीनी खुशबु ओर फैली हुई हैं ,,यह वचन सुनकर बिहारिनि जू बोलीं===प्रियतम ऐसे क्यों कलप रहे हो ?.मैंने कब मान किया है ?तुम् तो मेरे तन मन में हो ,,एक तुम् हीं तो मेरे हो ,,और मैं कहाँ जाऊं ,किसको अपनाऊं ? श्री हरिदास जी के स्वामी श्यामा ने श्यामकुंजबिहारी जी को अपने वश में कर लिया और दोनों केलि लीला में फिर से मगन हो गए ,,एक बार फिर रस में डूब गए ,,,,श्री हरिदास
 26-----Pyari teri mahima varni aa jaaey----In the nikunj mahal Lalji tells Ladliji “Oh Radhaji Ihave no words or vocabullary to to describe your greatness. I am like a mad cupid who is always engrossed in your nectoral , blissful beauty . I need you more than you need me , but you are most of the times in your
puffed up moods.Your madhurya has made me your slave.Swami haridasji says shyamaji has enchanted shyam sunder ji so muc that he has sold him self in her hands. Ladliji on hearingthis looked at bihariji with a slide glance and came near him to assure him that she too loves him equally.
पद ==27----श्रम जल कण नाहि होत,मोती माला कौं देहूँ ........................देखे बहुत अमोल मोल नहि.तन मन धन निछावरि लेहूँ .......रति वो प्रीत प्रीति कौं आलस ,नाहि नायक तेरे मधि ऐहूँ ........श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी प्रीति वर मिले वेहूँ ...... अर्थ --27 ---सुन्दर निकुंज में दोनों बिहारी बिहारिनि जू बैठे हैं ,,संग में हरिदासी सखी उनकी बातों का आनंद लेकर अति सुखी हो रही हैं,,,,,,,,आनंद में श्रम जल कब आई इसका तों उन्हें मालूम हीं नहीं चला ,,,यह जल की बुँदे ऐसी लग रही है ,मानो मोतियों की माला हो ,जो बिहारी जी ने उन्हें प्रीति से पहनाई हो ..इनका तों कोई मोल हीं नहीं ,एक एक मोती की कीमत का अनुमान लगाना संभव नहीं है ,,इनपरतों कुञ्ज बिहारी जी ने अपना तन मन धन सब निछावर कर दिया है ,, श्री हरिदास जी के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी लाल जी की प्रीति से उनके अंगों की छेद की उपमा दी है ,जिसको प्रेम रूप डोरे में उन मोतियन को पिरो कर बिहारी जी ने ,लाडली जू को पहनाई है ,,,श्री हरिदास
 27-------Shrm jal kun baahin, hoth moti mala ko dehu------- Once during keli leela in the nikunj Lalji was sweating . The drps of the sweat looked like small perls around Radhaji’s neck and it seemed that Radha ji was wearing a priceless neckless around her neck. In other wrods Lalji hadgiven his life and soul to Radha ji.Swami Hari das ji says “Lalji has made these pricelss beads out of the pores of his body and then made a mala or necklae out of it for the sake of hislove for Radha ji. Thus bot are earing these priceless mala and are experiencing absolute bliss.
पद ---28 ===नील लाल गौर के ध्यान बैठे कुञ्ज बिहारी .....ज्यूँ ज्यूँ सुख पावत नाहिं, त्यूँ त्यूँ दुख भयो भारि,,,,अरबराइ प्रगट भी जो सुख भयो बहुत हिया री ...श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी करि मनुहारी................../अर्थ --28 ---निकुंज में लाल जी वा [और] लाडली जू अति सुन्दर सेज पर बैठे हैं ,लाडली जू ने विचित्र श्रृंगार किया हुआ है ,,वा [और] बहुत हीं खूबसूरत दिख रहीं हैं ,उनके लुभावने रूप को देखकर ,बिहारी जी ध्यान में बैठे हैं ,,निकुंज में हरिदासी सखी के साथ अनेक और भी सखियाँ यह देख कर आनंदित हो रही हैं तभी एक सखी दूसरी सखी से कहती है ---हे सखी ,,राधा जी कि तों नथ चमक रही है ,,,,देखो आज नथ कि शोभा निराली हीं है ,,उज्जवल गौर नथ के बीच दो मोती ,जिनमें नील मणि गड़ी हुई है ,जिसे देखकर बिहारी जी ,कैसे नथ को निहार रहें हैं......ऐसे लग रहा है ,वह नथ को देख कर विचार कर रहें हैं और ऐसे ध्यान में चित्र ला रहें है ,मानों राधा जू कि नथ ,उनके कपोलन पर थिरकती हुई ,व्यंग भरी हँसी की बात कर रही है ,,...लाल जी यह देखकर सुख नहीं पा रहे .बल्कि दुःख पा रहे हैं कि वह अधरामृत का पान नहीं कर पा रहे .......वह तों राधा जू पर बलिहारी जाते हैं वा [और]हा हा खाते हैं [गुजारिश करते है ]कि राधे जू मुझे सुखी करो और मेरी ओर निहारो.....................प्यारी जू ने उनकी दीनता देखकर उनको सुखी किया ,,,तब वह नथ की पराकाष्ठा आप हीं प्रकट हो गई ..श्री हरिदास जी के स्वामी श्यामा कुञ्ज बिहारी राधा जू को मनाते हुए ,मनुहार करते हैं ..===हे प्यारी ! मेरे मन में नाना प्रकार के मनोरथ का पोषण होता है ,तुम्हें जितना भी मिलूं .मेरी तृप्ति नहीं होती ,,,,,,श्री हरिदास..
 28------ Neel Lal gour ke dhyan bethe kunjbihari------ In the nikunj mahal Radha ji Is looking prettier than ever decked up in full shingar. In her fair complextion her nose ring (nath) is looking grand. There are two priceless beads hanging from the nath which ismoving in vibration like style. It seems that it is studded by neel mani which is a very precios gem. The sakh’s are watching and commenting, “sakhi look at bihariji’s gaze at Radhsji’s nath. It seems that he is imagining that Radhaji’s nath is mocking at him teasingly.Lal ji was not looking pleasedbecause he wanted to come near the nathwali who was ignoing him. However when swami sri haridas ji made Radha realise her his miserable stat of mind she came closer to bihariji and they were again normal as they used to be in the nikunj mahal.
पद =29 ..पद == ===आजु की बानिक प्यारे तेरि प्यारी तुम्हारी वरनि न जाई छवि .....इनके स्यामता तुम्हारी गौरता जैसी सित असित वेनि रहि भवुन्गम ज्यों दबि इनको पीताम्बर तुम्हारो नील निचोल ज्यों ससि कुंदन जेब रवि....श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी की सोभा वरनि न जाये जो मिले रसिक कोटि कवि........................
..अर्थ =पद =29 ===मनोहर निकुंज में दोनों प्रिया प्रियतम अंग अंग सन्मुख हुए सुन्दर आसान पर बैठे हुए हैं......एक सखी दूसरी सखी से कहती है --आज की यह नविन शोभा तों बहुत सुन्दर वा [और]विचित्र है जिसका वर्णन करना असंभव है ,,,हो प्यारी जू !श्याम जी की श्यामता और तुम्हारी गौरता झलक रही है ,जिसके कारण यह बाहर प्रकाशित हो रही है , सफ़ेद और काली वेणी की उपमा देते हुए कहती है ,कि जैसे ,,काली वेणी पर सफ़ेद फूल दीखते हैं वैसे हीं इनके अंग कि गौरता ,ऐसे हीं लिपटे हैं ,बिहारी जी के श्यामता से ..............बिहारी जी का पीताम्बर आपकी नीली साड़ी ऐसे लग रहे हैं ,मानों आपका चन्द्र सा मुखड़ा नीलाम्बर में शोभित है ,,,,,,,श्री हरिदास जी के स्वामी श्यामा कुञ्ज बिहारी दोनों कि शोभा का वर्णन करना बहुत मुश्किल है ,,,इनके ये मनोरथ रूप कोटि कोटि रसिक या महान से महान कवि भी बखान नहीं कर सकते ...हम तों केवल आप दोनों के सुख को देखकर ,अपने नेत्रों को शीतल कर लेतें हैं ..श्री हरिदास
 29------ Aaj ke vanika pyare teri pyaari -----The divine cople as usual is surrownded by sakhi in the nikunj mahal. They are amazed to see their beauty today and one sakhi tells other sakhi’s that todays beauty is unique from other days. The duo are looking fresh and youthful. The dark complexion of bihariji and the fair complexon of Ladliji are lightening each other.They have compared it to a veni which is decorated wih white flowers.
The yellow pitamber yellow robes of Bihariji and the blue sari of Radhaji is compared to the moon in the dark blue sky. The sakhi’s are amazed to see such beauty which is undescrible.Swami sriHari das ji says, There are no words to describe this beauty which even millions of rasiks cannot even describe. The sakhi’s in the nikunj feel they are fortunate to have glimpse of this blisful jori which satifies their heart and soul.
पद ==30====देखि देखि फूल भई ,प्रेम के प्रकास प्रीति के आगे ह्वे जु लई .........सुनु री सखी बागों बन्यो आजु तुम् पर तृण टुटत है जु नई ..............
..श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी सकल गुन निपुन ता ता थेई ता थेई गति जु थई पद--30 ===फूलन कि सेज पर पिया -प्यारी फूलों के भूषण पहने हुए अति सुन्दर लग रहे हैं ..फूलन ते फूलें दोनों का श्रृंगार अति रुचिकर लग रहा है..श्यामा -श्याम इतने सुकुमार हैं कि उनसे फूलों का भार भी नहीं उठाया जाता ,,इनके तन मन कि उमंग फूलों से कम नहीं है ,,सेजिया में बिछे हुए फूलों कि पंखुड़ियों से इनके कोमल सुकुमार तन में गड़ न जाये ,यह सखियों कि कोशिश है,,,,,वृन्दावन का रोम रोम नवल जोरी को सुखी करने के लिए ,इनकी सुकुमारता के अनुरूप सब सांज तैयार कर के देना चाह रही है ,और कर भी रही है ,,सब ओर से नाना प्रकार के फूलों से निकुंज मंदिर महका हुआ है ...महा आनंद में फूले ना समाते हुए ,फूलों के हीं श्रृंगार किये हरिदासी सखी जी ने ये वचन सखियों को बोले -----सखियों आज तों अंग अंग फुलवारी देख देख कर मैं फुल गई ..अंग अंग में फूल मानो ,प्रेम की प्रकाश लाडली जु कितनी कृपालु हैं ....इनके नैनो की चाह देखकर ,बिहारी जी ने अपनी प्रीति के आगे करके कहा----प्यारी !मेरी पास आ जाओ ........सुन री सखी ,,यह लम्बा वस्त्र जो मैंने लायाहै ,उससे तुम्हे ढक लुंगा ,और ऊपर से यह चंद जो की ओढ़ने का एक खास बंद है ,उसमें तुम्हें बंद करके .यह लाल तों पै बलिहार जाता है .....................हरि दास के स्वामी श्यामा कुञ्ज बिहारी दोनों प्रिया -प्रियतम के पैर [चरण]ता ता थेई ता थेई नाचने लगे ,जैसे की उन्होंने ठाना हुआ था ,,सखियन इस मनमोहिनी झाँकी का दर्शन कर अघाती ना थी ..हरिदासी सखी तों यह देखकर अपनी सारी सुध बुध खो बैठी ,,सखियों ने हीं उन्हें समाधी अवस्था से बाहर निकला .....श्री हरिदास


 30-------dekhi dekhi phool bhaee------ In the nikunj mahal both are decorated with flowers. Hari dasi sakhi is so enchanted by todays shringaar of flowers that she uttered oh seeing them in this attire of flower shringaar I am puffed up (phool gai) The flowers are touching their body . Biharii has brought a cloak like cloth so that they can hide them selves from the other sahi’s.
Swami sri haridas ji says I amso much impressed watching their rythem of dance steps to the rythem of tha tha thai thai.


 (Courtesy:Asha Bhardwaj,)

HARI DAS KELILILA(11to 20)(Haridas bhajan.3)

HARI DAS KELILILA(11to 20)(Haridas bhajan.3)










KELILILA 11 to 20

HARI DAS KELILILA11 to 20 (Haridas bhajan.


पद --11--बात तो कहत कहि गयी , अब कठिन परि बिहारी प्राण तों नौं हि ने तन अस्त , विस्त भए कहय कहा प्यारी भाँवते की प्रकृति देखत जू , श्रम भयो बहुत हिया री श्री हरि दास के स्वामी स्यामा बाहू सौं बाहू मिलाये रहे मुख निहारी 
. अर्थ =पद..11===यद्यपि युग युगांतर से बिहारी बिहारिनी जी परस्पर मिलते चले आ रहे हैं , फिर भी उनकों मिलन की छट पटी लगी रहती है .निकुंज के बाहर तो लाल जी को तीनो लोकों में पूजा जाता है किन्तु निकुजों में स्यामा जू का ही राज्य चलता है .निकुंज महल में दोनों लाडली जू वा लाल जी अपने सिंहासन पैर बैठी हुयी हैबिहारी जू की बात पर लाडली जू हंसी जा रही हैं .उनकी बात पर जैसे विश्वास ही नही कर रही .उनकी दीनता वा आतुरता पर हंसती जा रही हैं .तब श्री हरिदासी सखी प्यारी जू से बोली -------------- अहो , प्यारी जू.. तुम आँखें मूँद के मंद मंद मुस्कुरा क्यों रही हो ?इनकी बात पर क्यूँ विश्वास नही कर रही हो ?.देखो तो बिहारी जू कितने परेशान हो रहे हैं .,,,हो प्रिया जू,,तुम इनकी दशा तो देखो ! इनके प्राण तो जैसे है ही नही ...इनको अपनी कोइ सुध बुध नही है . अब तुम क्या कहती हो ? यह सूनकर प्रिया जू को भारी श्रम हुआ की उन के कारण भाँवते को इतना कष्ट सहना पड़ा . श्री हरिदास के स्वामी स्यामा स्याम को गले लगा कर उनकी ओर निहारने लगीं . भोले से बिहारी जी अति प्रसन्न हुए और दोनों की फिर से बात शुरू हुई .श्री हरिदासी वहाँ बैठी उनको देख कर संतुष्ट हो गयी . स्यामा स्याम की जय ....श्री हरिदास
 11. Baat tho kaihat khai abb katthin pari Bihari------In the nikunj both are chatting with each other Radhaji seems to be in a very mischievious mood . She is going on laughing unbelieving to what Bihariji is saying. Infact she s making fun of his anxiety for her. Bihariji is obviously unhappy over this and looks at sakhi Haridasi for convincing her. Lalita sakhi who had incarnated as Haridas ji was watching this action of Biharaniji and as usual wanted to pacify her to be more attentive to Bihriji and said Oh Biharaniji you have closed your eyes and you don’t believe a word what Lalji is saying.You are smiling so sarcastly why don’t you believe what he is saying. Just look at him he is so upset and seems to be lifeless . He is not himself and seems to be sensless What do you say? Do you want him to be broken ? When Ladliji heard this she was touched by her action towards Lalji and felt bad that she had been the cause for making Bihariji so miserable. Quickly she came and hugged him lovingly and both were happy.

पद --12=कुञ्ज बिहारी हौं तेरी बलाई , लेऊँ नीके हौं गावत......राग रागनी के जुथ उपजावत, तैसे तैसी मिली जोरी.....प्रिया जू कौं मुख देखत चंद लजावत.....श्री हरि दास के स्वामी स्यामा कौं.....नृत्य देखत काही न भावत ...
 .पद 12 का अर्थ --पद--१२ ,,अर्थ -- आज निकुंज महल की शोभा कैसी कमनीय है , जिस का वर्णन ही नही किया जा सकता .शीतल , मंद ,सुगंध वायु से सारा बातावरण छाया हुआ है .मोर वा कोयल की मीठी ध्वनि चारों ओर से सुनाई दे रही है .निकट एक सुन्दर सरोवर के निर्मल जल में हंस अठखेलियाँ कर रहे हैं .धरती पर चन्द्रमा की शीतल चांदनी छिटक रही है .आज लाडली जी अति प्रसन्न दिखाई दे रही हैं .बिहारी जी से प्रेम से बतरा रही हैं .कुञ्ज बिहारी जू से बोली ---- हो कुञ्ज बिहारी जू तुम्हारी मैं बलिहारी जाती हूँ . तुम कितना सुन्दर गाते हो और विहार करते हो .लाल जू अति प्रसन्न होके बोले == हे लाडली जू मैंने कुञ्ज बिहारी नाम आप की कृपा से ही पाया हैआप इसी प्रकार से बोला करो और गाया करो .आप का मेरे प्रति जो स्नेह है उसके कारण अनेक मनोरथों के झुण्ड उपजते हैं .मेरे लिए यह सुख अपार है .सखी हरि दासी जो यह वार्तालाप वहीं सुन रहीं थी बोली --तुम दोनों की जोरी एक समान है .दोनों के मुख चन्द्रमा समान है . प्रिया जू को और लाल जू को दोनों मुख -चन्द्रमा देखते है , और प्रिया जू के मुख -चन्द्रमा के आगे लाल जू के मुख चन्द्र लजावते हैं .यानी प्यारी जू के अंग आगे पिया जू के अंग डूब जाते हैं .श्री हरि दास जी कहते हैं की दोनों में से किस का नृत्य विशेष है ?पिया को तो प्यारी जू का ही नृत्य भाँता है .यह वचन सुन कर बिहारी जी अति प्रसन्न हुए और बोले = - मैं बलिहारी जाऊं .आप की कृपा से प्यारी जू कृपा कर के नृत्य करे तो हमें क्यों नही भावेगा ?बहुत अच्छा लगेगा .श्री हरि दास..
 12. kunj Bihari hon teri balaai-------- In the nikunj both the couple are sitting together and Bihariniji seems to be in a good mood . At this juncture Bihariji says to Priyaji oh my most beloved piyaari we both are residends of this nikunj and keep on enjoying each others company since ages I pray to you that we continue for ever our pastimes and you keep on showering your love and kindness on me . It is due to you that I got the name kunj Bihari. Your love for me and my love for you is immeasurable .There is vibrating tones of music which enrich our love for each other..Every time I feel a new pleasure in your company .When Bihariji looks at the faceof Bihariniji even the moon feels ashamed if any one tries to compare her beauty with it. Sakhi Haridasi who was present there and listening to them smiled and commented ‘ both of you are equal in beauty I cannot say who is more beautiful than the other. She further commented that Biharniji is expert in dancing and Bihariji loves to watch her dancing because it suits her slender figure and each part of her body is so beautiful hence it is natural that Bihariji will love to watch her dancing He took her balaaia and thanked her for being so kind to him by showing her dance performance.
पद ---13,,-एक समय एकांत वन में , करत सिंगार परस्पर दोई वे उनके वे उनके प्रतिबिम्ब , देखत रहत परस्पर भोई ऐसे नीके आजू बने ऐसे कबहूँ न बने , आरसी सब झूठी परी कैसी एब कोइ श्री हरिदास के स्वामी स्यामा रीझी परस्पर प्रीति नोई ....
 अर्थ -पद =13---- आहा आहा ! सखियों आज तो लाडली जू का श्रृंगार बिहारी जी अपने कर कमलों द्वारा कर रहे हैं . श्रृंगार की सामग्री कितनी अच्छी प्रकार से रखी हुई है कि एक एक सौंज दिखाई दे रही है.....अरगजा ,इत्र, कस्तूरी , से सराबोर हुए बिहारी जी कितने आतुर लग रहे हैं . आस पास देखो तो कैसे फूल झूम रहे हैं . उनके आस पास भ्रमर मीठे मीठे गीत गुनगुना रहे हैं . दोनों एक दुसरे को इस तरह देख रहे हैं जैसे पहली बार देख रहे हों... पिया का प्रतिबिम्ब रूप हार मानो प्यारी जू ने पहना हुआ है , और पिया के उर में मानो प्यारी जू का प्रतिबिम्ब शोभा दे रहा है . आज तो दोनों एकांत ही वन में श्रृंगार का सामान ले कर निकल गये . केवल हरिदासी सखी ही संग गई हुई हैं और देख कर उनकी शोभा का वर्णन कर रही हैं ..हरिदासी जी के वचन इस प्रकार है - एक बार दोनों एकांत वन में सखियों से बच निकले और एक दुसरे का श्रृंगार करने लगे वे एक दुसरे के प्रतिबिम्ब को देख कर खुश हो रहे हैं . दोनों के अंग अंग हिल मिल के एक रूप हो गये,,आज के श्रृंगार और दिनों से विपरीत ही है .यह श्रृंगार परस्पर देखत ऐसे बने बैठे हैं जैसे कभी नही बने की इनकी आरसी (शीशे की अंगूठी ) भी झूठी पड़ गयी . श्री हरि दास जी के स्वामी स्यामा जी कहते हैं की बिहारी जी तो बिना मोल बिक गए और लाडली जू पिया के श्रृंगार में रीझ गयी . दोनों की प्रीति अंग अंग में मिल कर एक हो गए .,,,,सखी आज तो सभी उपमा झूठी पड़ गयी हैं ,इनके समान त्रिभुवन में कोइ इतना खूबसूरत नही हुआ है ना ही होगा . सखी आशीष देती है की इनकी प्रीति नवीन बनी रहे . इस प्रकार जब बिहारी जी ने बिहारिनी जू का नख से शिख तक का सोलह श्रिंगार किया तब प्रिया जू ने लाल जी को प्रेम से देखा . यह देखकर लाल जी के सभी अंग चंचल हो गए . फिर ऐसा खेल रचा की रस ही रस से खेलने लगा .
 13. ekk same ekant vana me------ On one occasion the divine couple had gone to ghewar vana . When they reached the deep woods Bihariniji was tierd and could not go further. They stopped near a kadamb tree and opened up the make up box which contained altta, sindur, bindi. Jewelry etc. The necklace of both of them were studded with gems which acted as mirrors for both of them to see their reflection.. What a lovely sight it was to see them watching themselves in the mirrors of each others ornaments. Lalita sakhi is watching them doing each others make up and how they are enjoying watching each other. Both are feeling that they have never looked so beautiful ever before. Today the shringaar is very different from other days. The mirriors studded in the ring gems is not showing the real picture of the couple. Swami shri Haridas ji says that Lalji on seeing such beauty of Ladliji was so stunned that he was ready to be sold in her hand.. On the other hand Ladliji too was stunned to see Lalji who was also looking so lovely. Both of them could not contain themselves and were soon embraced in each others arms.
पद 14---राधे चली री हरि बोलत कोकिला अलापत सुर देत पंछी राग बन्यो . जहां मोर काछ बांधी नृत्य करत , मेघ मृदंग बजावत बंधान गन्यौ प्रकृति की कौं नाहीं यातें सुरति के ,उनमान गहि हौं आई मैं जन्यौ . श्री हरि दास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी की अट पटी बानि औरे कहत कछु औरे भन्यौ.............
अर्थ --पद =14....सुन्दर निकुंज धाम जहां निरंतर आनंद रस छलकता रहता है , इस रस में दोनों बिहारी जी वा बिहारिनी जू रस में छकि रहें हैं . आज प्रियतम गुप्त से प्रिया जू को मिलना चाहतें हैं .....इतने में कोकिला की आवाज़ सुनाई दी जो ऐसे सुर में गा रही थी मानो पपीहा पिया - पिया की रट लगा रहा हो ...लाडली जू तो मगन हो रही थी परन्तु लाल जी व्याकुल हो रहे थे . तब एक सखी ने प्यारी जू को सावधान करना चाहा और बोली ---- हे श्री प्रिया जू तुम्हे कुञ्ज बिहारी बुला रहें हैं . वह बोल रहे है राधे जू चलो हमारे साथ . देखो तो कैसे कोकिला अलाप रही है मानो व्याकुल पपीहा तुम्हारे अधर अमृत रस स्वाति की एक बूंद चाहता है .,वह इतने व्याकुल हैं कि तुम्हारे रूप रस में लीन हो गयें हों . मानो तुम्हारे स्नेह की मूर्ति बन गए हैं ...चारों ओर मोर और मध्य में बावरों मोर नृत्य कर रहे हैं ....वो मोर बिहारी जी ही हैं . आप की रूप माधुरी को देख कर बिहारी जू रुपी मोर के रोम रोम नृत्य कर रहें हैं और यह मेघ स्याम अंग अंग मिल कर मृदंग बजा रहे हैं.. तुम्हारी बंधान यानी ताल , तुम्हारे और इनके मन को बाँध रहें हैं . श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कहतें हैं की यह अट पटी वाणी कुछ और ही कह रही है,,जो भी हो प्यारी !==हमें तों यह भान हो रहा है की हमारे मिलन मैं यह आनंद की चाल है...... श्री हरिदास .
 14 Radha chaal ree Hari bolat kokila alaapaat------ In the transcendal grooves of the divine Vrindavan known as nikujmahal the divine pair were enjoying the highest form of love. The sakhi’s too are seated around them trying their best to please them by doing services like singing, playing the sitar, fanning the couple etc. Suddenly Biharii wanted some privacy and makes a jesture to Bihariniji to go out of the nikunj into the woods where the koel is singing in her magical koohoo koohoo tone . Now the tune changed to that of a papiha. Radha ji was so engrossed in listening to the tunes of the birds that she over looked Lalji’s jestures to come out. On seeing this situation Haridasi who could not bear to see Lalji in sucha despair adressed her and says Ladliji please come out of your meditation abd pay attention to wha Lal ji wants .He is going on and on repeating your name and is begging you to go to the deep nikunj where the nightingale is singing priya priya. Lalji is desperate to go there wih you and it seems he has become a statue in your love. He is imagining as though he is surrounded by peacocks all around him and he is dancing along with their steps in full ecastcy. Whenever he glances at your utmost beautiful face his every part is dancing with joy . The clouds are making a lovely thundrous sound as they are playing the mridang along with the rythem of the dance.Radhaji you have completely bounded him with your love. Haridasiji was so concerned that she almost gave it off to Radhaji and orded her to show some compassion towards him and go with him whereever he wants to go. Radha ji who respects Lalita sakhi could not disobey. Besides she realised that she was being a little harsh in her behaviour so she agreed and held his hand lovngly and both went towards the outer nikunj.
पद --15 ,तेरो मग जोवत लाल बिहारी ,तेरी समाधि अजहूँ नहि छुटत.......चाहत नाहिं ने नेकु निहारी ,औचक आई द्वै कर सौं कर मूंदे नैन अरबराई उठी चिहारी .....श्री हरिदास के स्वामी स्यामा ढूढत वन में पाई प्रिया दिहारी. .
पद 15 का अर्थ ,,,,स्वामी श्री हरिदास जी जो ललिता रूप में बिहारी बिहारिनि जी की सभी लीलाओं का सृजन करती हैं ,,,,,वह अपने लाडले वा लाडली जू के साथ दिन दिन लाड़ लड़ाते रहते हैं इनका आधार हीं उनके विहार को देखना है ,,इसी उज्जवल रस की लीला माधुरी का वह पान करती रहती हैं ,,,,,,,,,,एक समय लाडली जू बिहारी जी को भाव नहीं दे रही थीं ,,सखियों के संग हीं वार्तालाप कर रहीं थीं ,,,,,,तभी एक सखी आई और बोली ===हे प्यारी राधे जू !आपका बिहारी जी मार्ग जोह रहे हैं ,,बहुत इंतजार करने के बाद ,उन्होंने हमें आदेश दिया है कि आपको बुलाकर लाएं ,,इसलिए प्यारी जू चलो ..आप इस तरह मान नहीं करा करो .......लाल जी तुम्हारे ध्यान में मग्न हैं ....आपकी कृपालुता का मार्ग जोवत हैं ....वह तो आपके ध्यान में समाधि में लीन हैं ,कि इधर उधर भी नहीं निहारना चाहते ,,,,,,,हे सखी ,अपना मान ,अयान ,सयान ,तजी के लाल जी के पास चलो ..जब सखी ने प्रिया जू को यह वचन बोले तो ,अचानक कुञ्ज बिहारी जी के पास चली गई और अपने कोमल करों के द्वारा उनके दोनों नैनो को मूंद लिया ...............उनके कोमल हाथों के लगते हीं बिहारी जी हड़बड़ाये से उठे और बोले --कौन है ??.क्या ये प्यारी जू हैं ?..तब प्रिया जू मुस्कुराईं और हँसकर उनको सुखी किया ,,,,उनका चन्द्रमा जैसा मुख आनंद से प्रसन्न हो गया और प्रेम में दोनों श्यामा श्याम मिल गए ...श्री हरिदास जी के स्वामी श्यामा को ढूंढते तन रुपी वन में हीं प्यारी जू को मिले ..यह सुख देख कर अति प्रसन्न हुए ...श्री हरिदास ..15. tero mugg jowat lal bihari-------- once Ladliji was puffed up with Bihariji and Lalji was trying his best to bring her out of that mood so that both could enjoy the keli leela. A sakhi who noticed this situation intervens and reminds Ladliji Oh pyiari ju look at Lalji he is waiting for you to talk to him. When wil you show your mercy to him ? It seems he is in deep meditation and his eyes are closed as if he has no desire to look here and there. Radhaji, now it is high time you shed away your puffed up mood and go give him solace. On hearing this Ladlii as if was woken from a deep sleep suddenly got up and covered Bihariji’s eyes with her fragile hands..At this Bihariji got a shock because it was too sudden and he had not expected it at all. He just uttered ‘Is it you pyaari?’ Radha ji was very happy at this and started giving him joy by holding his hands and were soon in their favourite pose in the embrce position. Swami shri Haridas ji says may the divine pair always be engrossed in their such pastimes and the sakhi’s go on getting this opportunity too watch their divine leela. So that teir life also becomes worthwhile.
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.पद--16 ===मानिं तूब चलि री संग रहेवो कीजै ......तौं कीजे जो बिन देख जीजै....ये स्याम घन तुम् दामिनी प्रेम पुंज वर्षा रस पीजै....श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी सौं .हिलि मिलि रंग लीजै.......................
. अर्थ --16,निकुंज महल में अनुपम जोरी सुन्दर सेज पर विराजमान हैं ..सब सखियाँ इस रस का नित्य पान करती हैं ,,,जो उनका आहार हो गया है ,,,,,बिहारी जी हीं इनका जीवन हैं ,..श्री हरिदास रस -रीति में वास्तव में मान है ही नहीं ,,,,,,केवल रस का उपासक है ,मान का तो केवल भ्रम हो जाता है ,,यह अनुपम जोरी अति हीं सुकुमारी ,सरस -रसीली ,चितवन युक्त और मंधुर अति मधुर है ,,इनकी प्रीति दृढ है और बिहारी जी को कई बार यह भान होता है कि किशोरी जू उनसे रुठीं हुईं हैं ,,.बात करते करते जब अचानक वह चुप हो जाती हैं ,तब लाल जी यह समझते हैं कि इनको मान हो गया है ..जब् कि प्रिया जू अपनी हीं ख्यालों में डूब जाती हैं ...यहाँ इस पद में भी ऐसा हीं हुआ ......यह श्याम घन प्यारी दामिनी के अंक में मिलना चाहते हैं ,परन्तु दामिनी तो अनूठी हैं .....अपना स्वभाव प्रकाशित कर रही हैं ..और मान करती हुईं प्रतीत हो रहीं हैं ..,,,,,तब सखी हरिदासी बोली====राधा जू सुनो ! आपने अपने कमल रुपी नैन बाँके क्यों किये हुए हैं ?....उनको सीधा करो और बिहारी जी के साथ चलो ...तुम् दोनों तो रस कि खान हो ...अतः तुम् हमेशा संग संग रहा करो ....जब तुम् मान करती हो ,तब कुञ्ज बिहारी जी ,कितने दुखी हो जाते हैं ...इस बात का आपको क्या भाँ भी है ?...............उनके बिना कुछ कहे बोले या कहे हीं ,मुझे मालुम चल जाता है कि वह तुम्हारे मिलन कि चाह कि आशा लगाये हुए हैं ......परन्तु तुम्हें इस बात की समझ हीं नहीं है ...तुम् दोनों तो प्रेम की पुंज हो.. तुम्हारे अंग अंग मिलके हीं तो प्रेम की वर्षा करते हैं ,,आप वही रस का अनुभव करो ,उसे चखो ,,अपनी हठ और जिद को छोड़ दो ....अपने मन में विचार करो कि क्या यह तुम् ठीक कर रही हो ..??...श्री हरिदास जी के स्वामी श्यामा कहते हैं ,,,,तुम् कुञ्ज बिहारी से घुल मिल कर रहो और एक हो जाओ .....आपस में नैनों को नैनो से मिलाओ ,अंग से अंग निलाकर प्यारे जू को सुखी करो ,,,यह सुख से उनपर आपकी अति कृपा होगी ,एक ही सुख लाल जी को भावै.सो प्यारे को रुचे ..उनका मनोरथ पूर्ण कीजिये ,,,,,,श्री हरिदास..
 16. maani tub chaali ree ek sang raso keeje----- on one occasion Bihariniji was in one of her off moods and was not talking to lalji who felt very upset and miserable. A sakhi was watching very closely and intervened and asked her Oh Ladli ji why is your gaze looking at a blank place. You seem to be so annoyed without any reason. Please calm down and straighten your gaze at Bihriji who is waitng for you to be in your pleasant mood. He is known as Raas Bihari because he is always keen to enjoy your nectoral love Both of you are made for each other. You must understand Bihariji’s feelings for you. Both of you are
like a cloud and lightening bound to each other and cannot be seperated even for a second. Don’t be obstinate and go and enjoy keli with Bihariji.

VANSHI OF KAHNA----kanha’s vanshi or muralia is so melodious that it enchants not only the damsels or gopi’s of vrindavan but even the trees of vrindavan, the goverdhan hill, the waters of the rivers, the kunds and the ponds.The true devotees completely forget whatever they are doing the moment the melodious voice of vanshi enters their ears.They at once come in the samdhi state and the pleasure they get is undescriable in words. Those who saw Krishna at that moment experinced the blue coloured beauty of Krishna’s oval face which can be compared to a blue lotus flower with beautiful eyes like a khanjan bird whose eyes are oval shaped and big. The humming bees who are buzzing all around him mistake his eyes for a flower full of nector His beautiful nose is if such a lovely shape and is capable of killig millions of cupids as well as Kaamdev the god of love. His red lips are of the colour of sindur and his arms resemble a newely formed branch f a tamaal tree. The vats mark on his chest which was made by Bhrigujee looks s like a line drawn by the lightening in the midst of blue clouds. This tune of kanha’s vanshi can be heard in the 84 kos of brij bhoomi. If one is keen to hear this vanshi just sit down quietly ,first keep on watching your breathing from the nostrals and concentrate on the middle of theforehead where we apply tilak go on practicing for years and years without loosing your patience and one day you will defintely hear the vanshi of Kanha. Only, the will should be strong and true.
Listen to the enchanting tune of Kanha’s flute. In the rythem of this magical tune Bihariji is all out to dance in the raas with our beloved Radhaji in the nikunj mahal Every where the divine nikunj is decorated by the divine creepers who are so thrilled to be a witness of this divine raas of Raas Bihari. All the sakhi,s are singing the glories of the divine pair.The enchanting tune of the flute is so magical that river yamuna ji has stopped flowing. The coloured lotus flowers are at a stand still and look like stautes The beauty of Vrindavan has increased many many times more. There is no limit to the absolute bliss of the creepers and he trees of Vrindavan The peacocks, saras, the swans , nightengales and other birds of Vrindavan are so much enchanted that they have forgotton themselves and their own sweet voices in he midst of Kanah,s flute. The flowers too are swingig to the tune of the vanshi in the midst of such an environment. Swami Sri Hari das ji enters and tells the other sakhi,s friends come and enjoy this auspicious moment which enchants every living and non living being. At that moment Radha ji request Bihariji to give her the flute and tries to play it but all in vain because it can play oly Radhe Radhy and nothing else.
..पद ==17 ,,,,तू रिस छाड़ी रे राधे राधे .....ज्यौं ज्यौं तोकों गहरूँ त्यों त्यों मोको बिठा रे साधे साधे......प्रानिन कौं पोषत है री तेरे वचन सुनीयत आधे आधे ,,श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कुञ्ज बिहारी ,,,तेरी प्रीति बाँधे बाँधे ,,,...............
 .अर्थ ---17 --नवीन प्रीति कुञ्ज में लाल जी नित्य राधे जू के आधीन रहते हैं ,,,राधे जू मानिनी बनी रहती हैं,,सुन्दर रूप सेजिया पर दोनों बैठे हुए हैं ,चारों तरफ सखियों से घिरे हुए सेवित हो रहें हैं ,,हमारे बाँकेबिहारी जी वा बिहारिनि जू,इतने में अचानक एक चुप्पी होने से सखियाँ इशारे से एक दूसरे को पूछने लगी कि क्या हुआ ?राधा जू क्यों बिहारी जी से बात नहीं कर रहीं हैं ?तब हरिदासी सखी राधा जी को संकेत करके बोली ---अहो प्यारी राधे ,तुम् रूठना छोड़[[रीस छोड़ ]] दो और लाल जी से खुशी खुशी बात करो ....आप अचानक क्यों रूठ जाती हो ?.रूठने कि बात[रीस तो तब करो ]] तो तब करो ,यदि आपके कोई अधीन हो ..ज्यों ज्यों तुम् ढील करती हो .त्यों त्यों श्याम जी व्याकुल हो जाते हैं ,,..इनकी पीड़ा बढ़ जाती है ..मैं इनको बहुत धीरज देती हूँ कि तुम् चिंता नहीं करो ...राधा जी ,अभी ठीक हो जाएँगी ,और तुम्हें बहुत सुख देंगी ,,,परन्तु यह विवश हो जाते हैं और आपके ध्यान में लीन हो जाते हैं ,,आप कृपा करके सावधान हो जाओ ,,प्यारी जू मैं सच कहती हूँ कि ..तुम् जल हो तो बिहारी जी उस जल के मीन हैं ...आप उनसे बात नहीं करोगी तो उनका दम घुटने लगेगा ,,क्या तुम्हें फिर अच्छा लगेगा ?..हे प्रिया जू तुम्हारे आधे आधे वचन सुनकर ,मैं हीं उनके प्राणों को पोषित कर रही हूँ,,मैं बार बार आपसे याचना कर रही हूँ कि अपना गर्व त्याग दो और उन्हें अंग से लगा कर सुखी करो ..श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुञ्ज बिहारी को तेरी प्रीति ने बाँध रखा है ,,वह तुम्हारे हीं ध्यान में हैं कि कब तुम् रूठना छोड़ कर [रीस को त्याग कर ]]उन्हें सुखी करोगी ,,,,श्री हरिदास
 17------tu rees chjaadin re radhe radhe-------the divine pair is seated on a beautiful seat in the nikunj mahal and Bihariniji is as usual puffed up and is ignoring Bihariji who is pleading before her to cheer up her mood.. Sakhi shri hari dasiji who always keeps a close look at the situation adresses Radha ji and tells her Radhe why are you always annoyed with Lalji without any reason or any fault of his. When you behave in such a mood lal ji feels very anxious and miserable. He is hurt when you ignore him. Though I convince him that Radha ji will be normal soon but he pays no heed to my words and closes his eyes and starts meditation of you. Please make him happy by talking to him and smiling at him. He seems to be a fish out of the water. Don,t delay any further and come and embrace him so that he can enjoy keli with you.
पद ==18 ==आज तृण टूटत है री ललित त्रिभंगी पर ......चरण चरण पर मुरली अधर धरें ...चितवनि बाँक छबिलि भू पर ...,चलहूँ न बेगि राधिका पिय पें ....जो भयौ चाहत हौं सर्वोपर ....श्री हरिदास के स्वामी स्यामा कों समयों जब नीकौं बन्यौ हिलि मिलि केलि अटल रति भइ धू पर .........................अर्थ --पद-18 ---छबीले कुञ्ज में दोनों ललित त्रिभंगी लाल जी वा प्यारी जू आनंद से बैठे हुए बतरा [बात कर ]रहे हैं ..आज तो लाडली जू अति प्रसन्न दिख रही हैं ,,,परम कृपालु बिहारी जी ,,से बोलीं ===हो बिहारी जू ,,आज हम दोनों अपना वेश बदलते है .मैं बिहारी जू बन जाती हूँ और आप राधा का रूप धर लो आनंद आएगा ..तब प्यारी जू पिया बने ,,त्रिभंगी यानी तीनों जगह से टेढ़े औए झुके हुए ,,बिहारी जू को यह सुझाव बढ़िया लगा ...दोनों ने अपना वेश पलट लिया ,,,उनका महा सुन्दर वेश देख कर सखियाँ अति प्रसन्न हुई,,वह उनको निहारे हीं जा रहीं थीं और बार बार उन पर बलिहारी जाती हैं .उनको नजर ना लग जाये ,तो सखियों ने एक तृण यानी तिनका तोड़ा...और बोली ==हे राधे जू ,,हे,बिहारी जू ..आप का सौंदर्य देखकर तो कामदेव जी भी लजा जायेंगे ,,आपको किसी की बुरी नजर न लग जाये ......जब प्यारी जू तीन जगह से बांकी होहो गयीं ...और बिहारी जी प्यारी जू बन गए तो ,वह नवीन दुल्हन की तरह मान करने लगे ,,अब लाल जी आतुर हो गए और विहार करते करते उनके चरण लाडली जू पर धर गए ...इस भांति दोनों ने केलि का सुख अनुभव किया ...प्यारी जू से बोले ----हो प्रिया जू ,आप बेगि चलो तुम्हारे अंग अंग में जो मनोरथ भरे हैं ,उनको मिला कर विहार कीजिये....हरिदास जी के स्वामी श्यामा अब निको बन गए .यानी कितने अदभुत वा सुन्दर दिख रहे हैं ..अलि,,ये तो नित्य अटल है .परन्तु आज तौकिं केलि तो पलटी गई है ..आज प्रिया जू की चाहत के अनुसार केलि का आनंद लिया दोनों ने ..सखियाँ तो देखती हीं रह गई की आज जैसा आनंद तो अत्यंत ही विचित्र था ,जो की बहुत मनमोहक था ..श्री हरिदास
 18.aaju trin tutat hae re lalit tribhangi paar------------- once Radha ji was in a very jovial mood and told Bihariji today I will become tribhangi ie crooked from three areas that is I will take your place and become Bihariji and you become Radhaji.. Today let us exchange our shringaar Both agreed and exchanged their attire Radha ji was in Bihariji,s dress and vice versa. The sakhis were overjoyed to see such a beautifu sight when both placed their foot on the other, murli on their lips, Radha ji was banki and today she led Bihariji who was in Radha ji,s attire to come out of the nikunj. They both enjoyed ths keli leela Haridasi who was watching this leela was so enchanted by their dance and love for each other and prayed no bad omen should ever happen with them and blessed them and said balihaari jaaun aapke.
पद=19 ==दिन डफ ताल बजावत गावत भरत छिन छिन होरी ....अति सुकुमार वदन श्रम बरसत .भले मिले रसिक किसोर किसोरी ..बातिन बतबतात राग रंग रमि रह्यो वा इत उत् चाहिं चलत तकि खोरी ..सुनी हरिदास तमाल स्याम सौं लता लपटि कंचन की थोरी...........................
.अर्थ --19==आज तो सखियों के उर में अदभुत आनंद छा रहा है ..निकुंज में बिहारी बिहारिनि एक दूसरे के संग विहार करते हुए ,अंग अंग में रंग छिड़क रहे हैं,,,,,,,बिहारी जी ,प्रिया जू के नैन कटाक्ष पर निरन्तररस रंग पिचकारी मार रहे हैं ..दोनों सूरत रस -रंग में भीजे [भींगे ]हुए ,सभी सखियों के तन मन को शीतल कर रहे हैं अबीर .गुलाल ,अरगजा की कीच मची हुई है...पूरा आकाश भी लाल ,कभी हरा .कभी पीला .कई रंगों से भर जाता है ...किसी को यह नहीं मालूम हो रहा कि कौन हार रहा है और कौन जीत रहा है ...ऐसा भान हो रहा है कि आनंद कि वर्षा हो रही है ..श्यामा श्याम प्रेम के उमंग में ,नवीन भावों से बात करते हुए चाव से होली खेल रहे हैं ,,हम्बे .नाहीं नाहीं ,हाँ जैसे शब्दों का प्रयोग बीच बीच में हो रहा है ..एक ही स्नेह में दोनों मग्न हैं .,,कपोलों पर रंग लगाते हुए ,वह सँकरी गली में चले जाते हैं ,,श्री हरिदासी देख देख कर प्रसन्न चित से ,यह दृश्य देख कर ..निज मन से [मन ही मन ]कि आज तो स्याम तमाल ऐसा लग रहा है ..मानो लता से लिपट गया हो और उसके अंग अंग में समा गया हो .,तो बिहारी बिहारिनी.को देखकर कि ऐसा हीं लगता है ,,और सखी के आनंद रुपी उर में विहार कर रहे हों ,ऐसा लगता है ............................ होली खेलते हुए श्याम कुञ्ज बिहारी की छवि का बखान किसी प्रकार से कोई भी नहीं कर सकता ,उनके अंग अंग से रंग छलछला रहा है ,,जिससे उनका तन मन प्राण ,रस होली में भीज [भींग] रहे हैं ..श्री हरिदास.19. din duff taal bajaavat gaavat----------- In the month of phagun ieFeb-March hoil is played in the nikunj also. Here the divine couple are applying gulal at each other and are dancing to the rythem of the daffli. Both are so delicate that one can observe how tierd they look. Both are walking arms in arms and are walking in a very special way just as people walk during the holi season. They are getting new ideas of expressing their love for each other. Both are laughing like naughty children while smearing each other with gulal and have dissapeared in the narrow lane known as ghewar vana. Haridasi says both are clinging on to each other in such a way as a climber clings to a trunk of a tamaal tree.Hari dasi sakhi is delighted to see the pair in such a loving mood.
.पद--20 ==द्वै लर मोतिन की एक पूंजा पोत कौं सादा ..नेत्रन दृष्टि लागौ जिनि मेरी .हाथिन चारि चारि चूरी पाँइन इकसार चूरा चौंप हलु एकटक रहे हरि हेरी .....एक तो मरगजी सारी तौ तें कंचुकी न्यारी ,अरु अँचरा की बायीं गति मोरि उरसनी फेरि ...श्री हरिदास के श्यामा कुञ्ज बिहारी या रस हीं बस भै हेरे हेरे सरकनि नेरी. .
अर्थ --पद--20...निकुंज में सुगन्धित गुलाब के फूलों की महक छाई हुई है , बिहारी जी और बिहारिनि जू इसमें मग्न गलबांही दिए बैठे शोभायमान हो रहे हैं ..अति सुन्दर कलियों की सेज पर प्रिया जू वा बिहारी जी ने कंठ में सुन्दर माला और बाजु में अति सुन्दर कंगन पहने हुए है ,बीच बीच में फूलों का सुन्दर श्रृंगार .किया हुआ है ,.साथ में हरिदासी सखी उन्हें देख देख कर आनंदित हो रही है ,वह भी सुन्दर फूलों के आसन पर विराजमान ,दोनों के साथ लाड़ लड़ा रही हैं ,वह बोली=देखो तो पिया की दोनों भुजाएँ श्री प्रिया जू के गले में ऐसी लग रही है कि जैसे दो मोतियों कि लड़ियाँ हों ,और कुँवरी जू के कंठ में कुँवर जी कि भुजाएँ मानो माला हीं शोभित हो रही हैं ,,..देखो तो सखियों कुँवर जी के नेत्रों में इतना अंजन भरा हुआ है ,मानों कि प्यारी जू को किसी की नजर ना लग जाये .....हाथों में चार चार चूडियाँ यानि पिया ने अपने हाथो से प्यारी जू के हाथ पकड़े तो उनके हाथों की अँगुलियों के निशान चूडियों की तरह बन गए हों ,,,और देखो जरा ,बिहारी जी के चरण राधा जू के चरण के ऊपर पड़े तो उसकी परछाईं ऐसी लग रही है यानी की आसन है ,,,,,,,,यह शोभा देख कर हरिदासी सखी एकटकी लगाकर देखती रही और प्रसन्न चित्त हुई मुस्कुराती हीं जा रही है ,श्री हरिदास जी के स्वामी श्यामा ,यह शोभा देखकर महा आतुर हो रहे हैं ,प्यारी जू की रूचि के अनुसार श्याम जी उनको सुख वा आनंद में भिगो रहे हैं ...श्री हरिदास ,
 20. doe larhi motin ki ek punj------------
In the nikunj mahal which is decrated with scented flowers like mogra, rose rajnigandha etc . Both are wearing a garland of mogra flowers and are wearing lovely braclets (kangan) on their wrists. One sakhi was so thrilled to see thier beauty that she uttered oh sakhi haridasi just look
How beautiful they are looking seated on an equally beautifully decorated seat decorated withso many varieties of flowers . Their scent is spreading everywhere giving a fabulous aroma and since both ae in such a good mood and are talking to each other giving loving smiles It gives me great pleasure and satisfaction At this Hari dasi replied yes sakhi just see the pair carefully. Lal ji has placed his arms on Priaji,s shoulder and neck It looks as though two pearl necklaces are placed on Priyaji,s neck.. Look at shree ji,s eyes . She has put so much kaajal so that their today,s joy is not spoilt by some bad omen. The bangles worn by Ladliji are looking as though Lalji is holding her wrist. And its finger impressions have been pressed on her wrist. Just see Ladliji,s foot it looks as if Lalji has pressed his foot on hers and it has become like a seat. This beauty is so stunning that even Lalji can not take his eyes off from Ladliji. Swami Hari das ji who is a witness to all this says oh my beloved Kunj Bihari and kunj Bihariniji how thrilled I am to see u in this posture.


(Cortesy:ASHA BHARDWAJ)